नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हुई, लगभग 4900 लोग अभी भी लापता
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के ढ़हने या हिमस्खलन से आई इस बाढ़ ने पिछले महीने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आज संसद में कहा कि इस बाढ़ से हुई तबाही हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिमों की एक गंभीर चेतावनी है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके प्रभावों को कम करने की जिम्मेदारी साझा करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आपदा की भयावहता और प्रकृति ने जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के सामने बढ़ते जोखिमों के बारे में गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
श्री शाह ने कहा कि विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक इस त्रासदी को उच्च हिमालय में बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन का परिणाम बताया है। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर संकेत है कि जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में उन्हें जिन जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, वे भी बढ़ रहे हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के योगदान का परिणाम है और इसके प्रभावों को कम करना और उनका प्रबंधन करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। श्री शाह ने कहा कि इस आपदा ने न केवल रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग के तीन प्रभावित जिलों को तबाह किया है, बल्कि पूरे देश को भी गंभीर झटका दिया है।
उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में देश के नेतृत्व को आंसुओं के बजाय साहस, समर्थन और आश्वासन देना चाहिए। बचाव और राहत कार्यों के बारे में प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है। वहीं, स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि सेना के हेलीकॉप्टर बचाव और निकासी अभियान चला रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर निजी हेलीकॉप्टर भी तैयार रखे गए हैं। श्री शाह ने कहा कि सरकार ने पीड़ितों के परिवारों के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत कर दी है, जबकि प्रभावित क्षेत्रों को तीन महीने के लिए संकटग्रस्त घोषित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि घायलों को मुफ्त चिकित्सा उपचार प्रदान किया जा रहा है, जबकि बाढ़ से विस्थापित लोगों के लिए भोजन और आश्रय की व्यवस्था की जा रही है। प्रधानमंत्री ने सदन को बताया कि स्थानीय और प्रांतीय अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, जल आपूर्ति और परिवहन संपर्क बहाल करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
श्री शाह ने बताया कि नेपाल को भारत, चीन, अमरीका, जापान, एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र सहित कई स्रोतो और बहुपक्षीय साझेदारों से सद्भावना संदेश और भौतिक सहायता प्राप्त हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि प्रधानमंत्री राहत कोष में अब तक 7 अरब नेपाली रुपये से अधिक की राशि एकत्रित हो चुकी है।
बचाव दल जोखिमग्रस्त क्षेत्रों से परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं, मलबे से अवरुद्ध सड़कों को साफ कर रहे हैं और स्थानीय अधिकारियों और निवासियों के साथ राहत तथा तलाश अभियानों का समन्वय कर रहे हैं। हालांकि, लगातार बारिश के कारण रसुवा और नुवाकोट में तलाश तथा बचाव अभियान बाधित हो रहे हैं।
इस बीच, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बचाव और राहत अभियान जारी रहने के कारण भारत नेपाल को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है। नेपाल में भारत के राजदूत ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि राहत और बचाव सहायता लेकर पांचवां भारतीय विमान आज दोपहर नेपाल पहुंच गया है।
विमान में विशेष सुरंग बचाव उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय बचाव दल और साढे पांच टन आवश्यक दवाएं हैं।