नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की जेएसएससी प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से हटाने की मांग
Relevance: PRIORITY Slug: BABULAL ON STATE Title: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने की जेएसएससी प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से हटाने की मांग
Synopsis: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा पत्र, जेएसएससी प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से हटाने की मांग, कहा- जिनके विरूद्ध जांच होनी चाहिए, उन्हें समिति में दी गई जगह। Category: Government , Planning , Politics Deadline: 26 AUGUST , RANCHI
26 अगस्त, रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर परीक्षा सुधार समिति से जेएसएससी प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार को तत्काल हटाने और उनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि परीक्षा सुधार समिति व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है, न कि संदिग्ध भूमिका वाले अधिकारियों को संरक्षण देने के लिए। उन्होंने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता चाहती है, तो उसे इस निर्णय को वापस लेना चाहिए।
श्री मरांडी ने मांग की कि परीक्षा सुधार समिति में स्वच्छ छवि वाले, पारदर्शी और ईमानदार सदस्यों को शामिल किया जाए। बाबूलाल मरांडी ने पत्र में लिखा है कि झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद सरकार ने परीक्षा सुधार समिति का गठन किया है।
किंतु यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है कि फरवरी 2024 से JSSC के अध्यक्ष पद पर आसीन वित्त सचिव प्रशांत कुमार को ही इस समिति में शामिल किया गया है। सितंबर 2024 की विवादित JSSC-CGL परीक्षा उनके ही कार्यकाल में आयोजित हुई।
परीक्षा रद्द करनी पड़ी, JSSC कार्यालय में छापेमारी हुई, आयोग के सचिव से पूछताछ हुई और पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा। ऐसे में जिस अधिकारी के कार्यकाल और प्रशासनिक भूमिका की स्वतंत्र निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए, उसे ही व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी देना स्पष्ट रूप से हितों का टकराव है।
प्रशांत कुमार के प्रशासनिक आचरण और कार्यशैली को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं। वित्त सचिव रहते हुए राज्य के खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर पर विभाग द्वारा स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया।
जल संसाधन विभाग से जुड़े एक मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने अदालत को गुमराह करने और आदेश का पालन नहीं करने पर उन पर जुर्माना भी लगाया था। इसके बावजूद उन्हें परीक्षा सुधार समिति में रखना सरकार की मंशा को संदेहास्पद बनाता है। यह निर्णय इतना स्पष्ट रूप से अनुचित है कि इसे देखने के लिए आँखों की भी आवश्यकता नहीं है।