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NHAI की 32 KM की सड़क में मिले 28 गड्ढे:DPR में डामर परत 50 MM बताई, जांच में कहीं 25, 26 तो कहीं 40 MM मिली

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 3 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
NHAI की 32 KM की सड़क में मिले 28 गड्ढे:DPR में डामर परत 50 MM बताई, जांच में कहीं 25, 26 तो कहीं 40 MM मिली

शहर की खस्ताहाल सड़कों के लिए बदनाम ग्वालियर अब नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के हाइवे को लेकर भी चर्चा में है। ‘ग्वालियर बायपास’ एनएच-44 पर मेहरा टोल प्लाजा से लेकर सिकरौदा तिराहा तक लिए गए हाइवे के सैंपल फेल हो गए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तीन स्पॉट पर सैंपल लेकर हाइवे की सड़क की गुणवत्ता को परखा गया था।

रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई है। जिसमें NSV (नेटवर्क सर्वे व्हीकल) की रिपोर्ट में चौकाने वाला सच सामने आया हैं। मेहरा टोल से सिकरोदा तिराहे के बीच आने-जाने की दूरी 32 किमी है। इसमें 28 गड्ढे मिले हैं। नेशनल हाइवे की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) में हाइवे की सबसे ऊपरी डामर की परत की मोटाई 50 MM तय की गई थी, लेकिन लैब टेस्टिंग में अलग-अलग स्थानों पर यह महज 25 mm से 40 mm ही पाई गई।

हाइवे (ग्वालियर बायपास) पर 3 पाइंट मायसेम ग्रीन बिल्डिंग के पास हाइवे की ऊपरी परत 25 mm, गोल्डन ट्री रेस्टोरेंट के पास 26 mm, और सिकरोदा तिराहे पर 40 mm मिली है। हैरत की बात यह है कि NHAI ने ठेकेदार को 843 करोड़ का भुगतान भी कर दिया है, लेकिन सड़कों पर गड्ढे भरे पड़े हैं। नेशनल हाइवे की ग्वालियर में गुणवत्ता पर दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं।

तकनीकी आयोग ने कोर्ट में पेश की रिपोर्ट ग्वालियर बायपास (NH-44) पर मेहरा टोल प्लाजा से सिकरौदा (चेनेज 32+600 KM से 41+450 KM) मार्ग की गुणवत्ता और निर्माण मानकों की जांच के संबंध में गठित तकनीकी आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत कर दी है। नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) और लोक निर्माण विभाग (PWD) व एमपीआरआरडीए (PMGSY) की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट में सड़क निर्माण और रखरखाव में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और घोर लापरवाहियां उजागर हुई हैं।

DPR में ही धांधली- पतली मिलीं डामर और गिट्टी की परतें आयोग और तकनीकी टीम द्वारा अलग-अलग स्थानों पर खुदाई कर जब नमूनों लेकर जांच की गई, तो कई बड़े खुलासे हुए हैं। ग्वालियर बायपास की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और अनुबंध के मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं है। 1.

बिटुमिनस कंक्रीट (BC Layer) डीपीआर के अनुसार सड़क की ऊपरी परत 50 mm होनी चाहिए थी। यह परत डामर की होती है, हालांकि, लैब टेस्टिंग में अलग-अलग स्थानों पर यह महज 25 mm से 40 mm ही पाई गई। हाईकोर्ट से गठित टीम ने ग्वालियर बायपास (नेशनल हाइवे) पर 3 पॉइंट में सैंपल लिए थे। जब यह सैंपल की रिपोर्ट आई तो बड़ा घोटाला नजर आया है। मानक से आधी मोटाई की परत मिली है। 2.

बाइंडर और बिटुमेन की मात्रा कम PWD लैब की अंतिम रिपोर्ट में बिटुमेन/बाइंडर प्रतिशत तय मानकों (5.2%) से काफी कम पाया गया, जिसके कारण परीक्षण में सड़क "Fail" घोषित हुई। सड़क निर्माण में बाइंडर और बिटुमेन की मात्रा कम होने का मतलब है कि डामर के मिश्रण में गिट्टी को आपस में जोड़ने वाला गोंद कम है। इसे तकनीकी भाषा में "Lean Mix" या "Binder Deficient Mix" कहा जाता है। जब डामर (बिटुमेन) की मात्रा जरूरत से कम होती है, तो सड़क की मजबूती, उम्र और गुणवत्ता पर बेहद गंभीर असर पड़ता है। सड़क पर जरा सा लोड पड़ते दरार आ जाती हैं। 3.

सब-ग्रेड मिट्टी का कॉम्पैक्शन फेल PMGSY और PWD प्रयोगशाला रिपोर्ट के अनुसार सड़क के नीचे मिट्टी का घनत्व (Compaction) न्यूनतम 97% होना अनिवार्य था। लेकिन जांच में यह मात्र 73.76% से 82.32% के बीच ही पाया गया। सब-ग्रेड मिट्टी का कॉम्पैक्शन (कुटाई) फेल होना सिविल इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन में एक गंभीर समस्या है।

इसके कारण सड़क, फुटपाथ या फाउंडेशन कभी भी लोड पड़ने पर धंस सकती है। 4. 843 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना 20 साल (30 महीने निर्माण और साढ़े 17 साल रखरखाव) के लिए बनाई गई थी। 21 सितंबर 2026 तक ठेकेदार को कुल ₹875.49 करोड़ की एन्युटी देय थी, जिसमें से ₹843.32 करोड़ का भुगतान NHAI द्वारा किया जा चुका है।

इसके बावजूद, सड़कों पर दरारें और गड्ढे लगातार बने हुए हैं। नियमानुसार जिन्हें 24 से 48 घंटे के भीतर ठीक किया जाना चाहिए था, वे हफ्तों तक जस के तस पड़े रहे। रिपोर्ट में यह भी किया जिक्र आयोग ने रिपोर्ट में सड़क गुणवत्ता के साथ-साथ सड़क सुविधाओं और सुरक्षा में भी कई गंभीर कमियां दर्ज की हैं।

वो भी इस प्रकार हैं… टेंडर प्रक्रिया और भुगतान पर उठे सवाल आयोग की रिपोर्ट में ठेकेदार कंपनी M/s RAMKY Infrastructure द्वारा टेंडर प्रक्रिया के दौरान तीन बार बोली (Bid) घटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। साथ ही, सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट के जरिए लगभग ₹80 करोड़ के रोके गए एन्युटी भुगतान को जारी करने के औचित्य और वैधानिकता पर भी प्रामाणिक जवाब न मिलने का उल्लेख किया गया है।

हाइवे पर सैंपल रिपोर्ट पर इनका कहना सड़कों की गुणवत्ता पर लगाई गई जनहित याचिका की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अवधेश तोमर ने दैनिक भास्कर को बताया कि नेशनल हाइवे पर मेहरा टोल प्लाजा से लेकर सिकरौदा तिराहा तक तीन पॉइंट पर सैंपल आयोग द्वारा गठित टीम ने लिए थे।

📡 स्रोत: NewsData.io

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