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निजी स्कूल शिक्षकों की पेंशन की मांग सुप्रीम कोर्ट पहुंची, केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 14 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति

याचिका में पेंशन के साथ पीएफ, ग्रेच्युटी, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय व्यवस्था बनाने की मांग

नई दिल्ली। देशभर के निजी स्कूल शिक्षकों को पेंशन और व्यापक सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की मांग अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। All India Teachers Federation की राष्ट्रीय समन्वयक Ligimol George की ओर से दायर याचिका में निजी स्कूल शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय कल्याण नीति और वैधानिक ढांचा तैयार करने की मांग की गई है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतिम फैसला नहीं सुनाया है, बल्कि केंद्र सरकार, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, NCTE और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

मामला Ligimol George बनाम Union of India & Others के नाम से Writ Petition (Civil) No. 1116 of 2026 के रूप में विचाराधीन है। 10 सितंबर 2026 को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया। मामले को करीब चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की बात कही गई है।

याचिका में निजी स्कूल शिक्षकों के लिए केवल पेंशन की मांग नहीं की गई है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था बनाने का आग्रह किया गया है। इसमें पेंशन और पेंशन संबंधी लाभ, प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी, चिकित्सा सहायता, स्वास्थ्य बीमा, दिव्यांगता सहायता, परिवार कल्याण और सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा जैसे प्रावधान शामिल हैं।

याचिका में निजी स्कूल शिक्षकों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी Grievance Redressal Mechanism और पूरे देश में सामाजिक सुरक्षा के न्यूनतम समान मानक तय करने की मांग भी की गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से National Private School Teachers Welfare Board गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। प्रस्तावित बोर्ड निजी स्कूल शिक्षकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के समन्वय, क्रियान्वयन और निगरानी के साथ शिक्षकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने तथा वैधानिक अनुपालन और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था में भूमिका निभा सकता है।

याचिका में निजी unaided स्कूलों से जुड़े करीब 37.3 लाख शिक्षकों के मुद्दे को उठाया गया है। हालांकि यह संख्या याचिका में बताए गए दायरे से संबंधित है और इसका अर्थ यह नहीं है कि इन सभी शिक्षकों को फिलहाल पेंशन का अधिकार मिल गया है।

याचिका का प्रमुख तर्क है कि निजी स्कूल शिक्षकों के लिए देशभर में एक समान सामाजिक सुरक्षा और पेंशन व्यवस्था नहीं है। अलग-अलग राज्यों और संस्थानों में अलग-अलग नियम होने के कारण शिक्षकों को मिलने वाले सेवानिवृत्ति और कल्याण संबंधी लाभों में अंतर हो सकता है। याचिका में सम्मानजनक जीवन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर संविधान के अनुच्छेद 21 का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि, पेंशन व्यवस्था लागू करने की राह में वित्तीय और प्रशासनिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। सरकारों की ओर से यह तर्क दिया जा सकता है कि निजी unaided स्कूल सरकारी संस्थान नहीं हैं और उनके कर्मचारियों की सेवा शर्तें निजी प्रबंधन से जुड़ी होती हैं। इसके अलावा लाखों शिक्षकों के लिए सरकारी स्तर पर पेंशन व्यवस्था लागू करने से वित्तीय भार बढ़ने का मुद्दा भी उठ सकता है।

मामले की मौजूदा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी निजी स्कूल शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के समान पेंशन देने का कोई आदेश नहीं दिया है। फिलहाल केंद्र और राज्यों समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। आगे की सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि इस मांग पर किस तरह की कानूनी या नीतिगत व्यवस्था की आवश्यकता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।