निर्वाचन आयोग में फैसलों को लेकर उठे सवाल, जमाअत ए इस्लामी हिंद उपाध्यक्ष ने CEC से जवाबदेही की मांग की
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SIR, वोटर रजिस्ट्रेशन और Form-6 में बदलाव को लेकर चिंता जताई; दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का हवाला
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रो. सलीम इंजीनियर ने निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर सामने आई रिपोर्टों के संदर्भ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की मांग की है। उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर लिए गए कुछ फैसलों और दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं।
प्रो. सलीम इंजीनियर ने एक बयान में द इंडियन एक्सप्रेस की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, Form-6 तथा मतदाता डेटाबेस से जुड़े मामलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी या सहमति के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों वाली बहुसदस्यीय संस्था है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त समान रैंक के सदस्य हैं तथा 2023 के कानून में आयोग के कामकाज को यथासंभव सर्वसम्मति से संचालित करने का प्रावधान है। मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय का प्रावधान है।
प्रो. सलीम ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान मतदाता सूचियों में हुए बदलावों पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम मसौदा मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम मसौदा मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं। यह आंकड़ा मसौदा सूचियों में हुई कटौती को दर्शाता है और इसे अंतिम रूप से मताधिकार से वंचित किए गए लोगों की संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में किए गए बदलाव का भी मुद्दा उठाया। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष Form-6 में SIR से संबंधित एक घोषणा जोड़ी गई थी, जिसमें आवेदकों से स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव को लेकर आपत्ति दर्ज की थी और नियमों में संशोधन के बिना ऐसा बदलाव किए जाने पर सवाल उठाए थे।
प्रो. सलीम ने मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस के केंद्रीकरण को लेकर उठाई गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया। Indian Express के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी डेटा से जुड़े IT सिस्टम और कार्य-विभाजन में बदलावों को लेकर चिंता जताई थी तथा इस मामले में कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखे थे।
उन्होंने कहा कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) मतदाता सूची को नियमित रूप से अपडेट करने की प्रक्रिया है और इसके माध्यम से पात्र नए मतदाताओं को सूची में शामिल करने तथा मृत, स्थानांतरित या अपात्र नामों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
जमाअत उपाध्यक्ष ने कहा कि योग्य नागरिकों के लिए मतदाता के रूप में पंजीकरण की प्रक्रिया सुगम होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियों और निर्णय प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि किसी अधिकारी की ओर से नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी बदलाव में पारदर्शिता, स्पष्ट नियम और नागरिकों के लिए प्रभावी आपत्ति एवं अपील की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके अनुसार, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों पर आयोग की ओर से स्पष्ट जवाब सामने आना लोकतांत्रिक संस्थाओं में सार्वजनिक विश्वास के लिए महत्वपूर्ण है।