निशा भगत की मौत आदिवासी समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर प्रहार : बाबूलाल मरांडी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
निशा भगत की मौत मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर बोला हमला, कहा- निशा भगत की मौत आदिवासी समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर प्रहार, निशा भगत की मौत आदिवासी समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर प्रहार, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिठौरिया दारोगा और अजय तिर्की की हो तत्काल गिरफ्तारी, मामले की हो सीबीआई जांच।
Short Headline: निशा भगत की मौत आदिवासी समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर प्रहार : बाबूलाल मरांडी
06 नवंबर, रांची: नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की आत्महत्या के मामले में राज्य की कानून-व्यवस्था और आदिवासियों के अधिकारों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि निशा भगत की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। आदिवासियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली एक सामाजिक कार्यकर्ता को आखिर किन परिस्थितियों में आत्महत्या जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा, यह बेहद गंभीर सवाल है।
श्री मरांडी ने कहा कि आत्महत्या से पहले निशा भगत ने फेसबुक लाइव के माध्यम से जिस पीड़ा और वेदना को व्यक्त किया, वह केवल उनकी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं थी, बल्कि राज्य की मौजूदा व्यवस्था की सच्चाई को भी सामने लाती है। उनके बयान में व्यवस्था के प्रति निराशा और न्याय नहीं मिलने की पीड़ा साफ झलकती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में जमीन दलालों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने जमीन की लूट और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए दलालों की एक पूरी फौज खड़ी कर दी है। अजय तिर्की जैसे लोग राज्यभर में सक्रिय हैं। जब कोई सामाजिक कार्यकर्ता इनके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं होती। निशा भगत का मामला इसी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
श्री मरांडी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी विधायक पत्नी कल्पना सोरेन मंचों से आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं, लेकिन धरातल पर आदिवासी समाज के साथ क्या हो रहा है, निशा भगत की मौत उसका उदाहरण है।
श्री मरांडी ने मांग की कि निशा भगत मामले में पिठौरिया थाने के दरोगा और अजय तिर्की को तत्काल गिरफ्तार किया जाए तथा पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि मामले से जुड़े सभी पहलुओं और जिम्मेदार लोगों की निष्पक्ष जांच हो सके।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री राज्य की कानून-व्यवस्था संभालने और जमीन दलालों पर नियंत्रण रखने में असमर्थ हैं तो उन्हें तत्काल मुख्यमंत्री पद छोड़ देना चाहिए। आज राज्य में नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और अपराध की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। साहिबगंज में एक सब-इंस्पेक्टर की आत्महत्या और सूर्या हांसदा की मौत भी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
श्री मरांडी ने कहा कि निशा भगत को सच्ची श्रद्धांजलि तब मिलेगी, जब आदिवासी समाज हेमंत सोरेन के इस्तीफा और सभी दलालों की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रखेगा।
बाइट- बाबूलाल मरांडी, नेता प्रतिपक्ष
💡 पृष्ठभूमि (Background)
निशा भगत की मौत के मामले में बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर हमला किया, दावा करते हुए कि यह घटना आदिवासी समाज की उम्मीदों पर प्रहार है। यह विषय पुलिस के कार्यों और न्याय प्रणाली की पारदर्शिता से जुड़ा है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सामाजिक न्याय और पुलिस जवाबदेही पर सवाल उठाती है, और सरकार की नीतियों पर आलोचना को बढ़ाती है। आम जनता पर इसका असर गहरा हो सकता है: आदिवासी समुदाय में असुरक्षा बढ़ेगी, और राजनीतिक ध्रुवीकरण तथा सार्वजनिक विश्वास में गिरावट संभव है।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
निशा भगत की दुखद मृत्यु से यह स्पष्ट होता है कि समाज में किसी भी विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी मार्ग से सुलझाना कितना ज़रूरी है। हिंसा का रास्ता न केवल पीड़ित के परिवार को गहरा आघात पहुँचाता है, बल्कि समग्र समाज की प्रगति को भी रोकता है। हमें एकजुट होकर कानून का पालन, संवाद और सहानुभूति को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि ऐसी त्रासदियाँ फिर कभी न हों।