नियुक्तियों पर फिलहाल ब्रेक:बीडीए, आईडीए समेत 34 निगम-मंडलों पर नवंबर बाद विचार
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →नए प्रदेश प्रभारी, संगठन महामंत्री की राय व सहमति लेने के बाद होगी कवायद प्रदेश सरकार के निगम मंडल व प्राधिकरणों में लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों पर इंतजार और बढ़ गया है। भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए), इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) समेत प्रदेश के करीब 34 प्रमुख निगम-मंडलों और प्राधिकरणों में अब नियुक्तियों पर नवंबर माह के बाद नए सिरे से विचार होगा, यानी अगले दो-ढाई माह में कोई नियुक्ति नहीं होगी।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक संगठन के अंदरूनी पुनर्गठन और शीर्ष स्तर पर निर्णय लेने वाले पदाधिकारियों का बदलना इसका मुख्य कारण है। प्रदेश भाजपा संगठन द्वारा बड़े पैमाने पर सांगठनिक संतुलन साधने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व में तैयार की गई प्राथमिक सूचियों में क्षेत्रीय व जातीय समीकरणों को लेकर विभिन्न वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग सुझाव सामने आए थे।
जिन पर सहमति नहीं बन पाई, वे सभी नियुक्तियां अटक गईं। इनमें 12 में से 10 शहरों के विकास प्राधिकरण अटके हुए हैं। अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने तय किया है कि नए संगठन महामंत्री के पदभार संभालने, जिला स्तर के कार्यकर्ताओं और पूर्व विधायकों के प्रदर्शन का रिव्यू (समीक्षा) पूरा होने के बाद ही नई नियुक्तियों पर विचार किया जाएगा।
मुख्य रूप से इन संस्थाओं में अटकी हैं नियुक्तियां शहरी विकास प्राधिकरण भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए): मास्टर प्लान और शहरी विकास की बड़ी परियोजनाओं के बीच पूर्णकालिक अध्यक्ष का पद रिक्त है। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए): इंदौर मेट्रो व इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को गति देने वाले इस प्रमुख बोर्ड में नियुक्ति अटकी हुई है।
ग्वालियर (जीडीए): सिंधिया और नरेंद्र तोमर के समर्थकों की लंबी कतार है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए): सिंहस्थ की तैयारियों के बीच यूडीए समेत महाकाल लोक क्षेत्र के विकास बोर्डों में दावेदारों की लंबी कतार है। व्यावसायिक व आर्थिक निगम एमपीआईडीसी एवं लघु उद्योग निगम: औद्योगिक निवेश और एमएसएमई नीति से जुड़े बोर्ड में राजनीतिक कमान की प्रतीक्षा है।
मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (एमपी-एसटीडीसी): पर्यटन नीति के विस्तार के लिए राजनीतिक नेतृत्व का इंतजार है। राज्य खनिज विकास निगम व बीज विकास निगम: ग्रामीण और कृषि-उद्योग से जुड़े ये बोर्ड भी सूची में शामिल हैं। टिकट से चूके और चुनाव हारे नेताओं की टिकी हैं निगाहें: नियुक्तियां टलने से उन नेताओं में सर्वाधिक बेचैनी है, जो पिछले विस और लोस चुनाव में टिकट मिलने से चूक गए थे।
पार्टी ने ऐसे सभी दावेदारों को सरकारी नियुक्तियों में ध्यान रखे जाने का वादा किया था। इसके साथ ही चुनाव हारे कई पूर्व विधायकों में भी नियुक्तियों को लेकर बेचैनी है। इनमें सबसे ज्यादा बेचैनी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर आए उन पूर्व विधायकों में है, जो 2023 में चुनाव हारने के बाद हाशिए पर हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io