नुक्कड़ नाटक से दर्शायी आदर्श ग्राम पंचायत की तस्वीर, छात्राओं ने समझी लोकतंत्र की पहली सीढ़ी
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छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक से दिखाई आदर्श ग्राम पंचायत की तस्वीर, ‘लोकतंत्र की पहली सीढ़ी’ का जीवंत मंचन, ग्रामीण समस्याओं से समाधान तक की प्रक्रिया को किया प्रस्तुत, पंचायती राज व्यवस्था की बारीकियों को व्यवहारिक रूप से समझा।
Short Headline: नुक्कड़ नाटक से दर्शायी आदर्श ग्राम पंचायत की तस्वीर, छात्राओं ने समझी लोकतंत्र की पहली सीढ़ी
मॉडल ग्राम पंचायत, खूंटी, ज्योत्सना
छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक से दिखाई आदर्श ग्राम पंचायत की तस्वीर
‘लोकतंत्र की पहली सीढ़ी’ का जीवंत मंचन ग्रामीण समस्याओं से समाधान तक की प्रक्रिया को किया प्रस्तुत
पंचायती राज व्यवस्था की बारीकियों को व्यवहारिक रूप से समझा
एंकर पंचायती राज व्यवस्था को किताबों से समझना और उसे व्यवहारिक रूप में जानना, दोनों का अनुभव अलग होता है। खूंटी के कालामाटी स्थित पीएम श्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के जरिए एक आदर्श ग्राम पंचायत की पूरी तस्वीर मंच पर उकेरी। ‘लोकतंत्र की पहली सीढ़ी’ नामक इस प्रस्तुति में छात्राओं ने ग्रामीण समस्याओं से लेकर उनके समाधान तक की प्रक्रिया को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
होल्ड अप साउंड : नुक्कड़ नाटक के दृश्य
वीओ-1 : खूंटी के कालामाटी स्थित पीएम श्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं ने ‘लोकतंत्र की पहली सीढ़ी’ नाम से नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। छात्राओं ने प्रस्तुति के जरिए बताया कि ग्राम पंचायत में ग्रामीण अपनी समस्याएं किस तरह मुखिया और ग्राम सचिव के सामने रखते हैं और जनप्रतिनिधि उनके समाधान की दिशा में कैसे पहल करते हैं। इस मंचन के माध्यम से छात्राओं को पंचायती राज व्यवस्था की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला।
बाइट- छात्रा
वीओ-2 : फूदी पंचायत की मुखिया अनिमा कच्छप ने छात्राओं के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रस्तुतियों से बच्चों को लोकतंत्र की पहली सीढ़ी यानी ग्राम पंचायत की भूमिका और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलता है।
बाइट- अनिमा कच्छप, मुखिया, फूदी पंचायत
वीओ-3 : बच्चों के इस प्रयास की गैरसरकारी संगठनों ने भी सराहना की। उनका कहना है कि नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यम बच्चों में सवाल पूछने, समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान की दिशा में सोच विकसित करने में मदद करते हैं।
बाइट- गणेश इंगले
अंतिम वीओ किताबों में पढ़ना और उसे व्यवहार में उतारना, दोनों अलग-अलग अनुभव हैं। छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से पंचायती राज व्यवस्था की बारीकियों को न सिर्फ समझा, बल्कि उसे व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत भी किया। ऐसे प्रयास बच्चों में लोकतांत्रिक मूल्यों और स्थानीय शासन व्यवस्था की समझ को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
खूंटी से ज्योत्सना की रिपोर्ट।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आदर्श ग्राम पंचायत की तस्वीर प्रस्तुत की, जिससे पंचायती राज व्यवस्था और लोकतंत्र की पहली सीढ़ी को जीवंत रूप से दिखाया गया। यह विषय ग्रामीण शासन और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रयासों को दर्शाता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि शिक्षा के क्षेत्र में रचनात्मक तरीकों से जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का ज्ञान बढ़ाया जा सकता है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोगों में ग्राम पंचायत के कामकाज के प्रति जागरूकता और विश्वास बढ़े, जिस