ओपिनियन: नेताजी सुनिए, यूपी-बिहार वालों को देखकर आपका खून क्यों खौल उठता है, ये अपनी मेहनत से हैं आपके रहमों से नहीं

महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान अनिवार्य करने के फैसले ने नई बहस छेड़ दी है. चार कैब ड्राइवरों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस नियम को चुनौती दी है.
अब बहस सिर्फ मराठी सीखने तक नहीं है, बल्कि रोजगार, प्रवासी मजदूरों की आजीविका और संविधान में मिले अधिकारों का भी है. सवाल यह भी है कि आखिर यूपी-बिहार से महाराष्ट्र आने वाले मेहनतकश लोगों को बार-बार ‘बाहरी’ बताकर राजनीति क्यों की जा रही है?
📡 स्रोत: News18 Hindi