ओवैसी ने SIR पर उठाए सवाल, कहा - '6 से ज्यादा बच्चों वाले वोटरों को...'
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हैदराबाद के सांसद और एमआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना में चल रहे एसआईआर को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने इस प्रक्रिया को दोषपूर्ण करार दिया है.
साथ ही मांग करते हुए समय सीमा को 21 दिन से बढ़ाकर चार हफ्ते करने की मांग की है.
ओवैसी ने कारवान विधानसभा इलाके में सात एसआईआर हियरिंग सेंटर्स का दौरा किया, इसके बाद उन्होंने भारी गड़बड़ियों की ओर इशारा किया है.
उन्होंने कहा है कि अकेले कारवान में 59470 गड़बड़ियां और 40,750 नो मैपिंग मामले पाए गए हैं. उन्होंने कहा है कि जीवित वोटरों को मृत दिखाया जा रहा है.
जो लोग अभी भी उसी एड्रेस पर रह रहे हैं, उन्हें शिफ्टेड के तौर पर लिस्ट किया जा रहा है.
साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि असली वोटर फाइनल लिस्ट से बाहर हो सकते हैं.
ओवैसी ने 6 से ज्यादा बच्चों वाले नियम पर जताई आपत्ति
इसके अलावा ओवैसी ने उस नियम की भी आलोचना की है, जिसमें 6 से ज्यादा बच्चों वाले वोटरों को नोटिस भेजे जा रहे है. इस एक बेहद ही अजीब मामला बताया है.
उन्होंने कहा है कि बच्चों की संख्या सीमित करने वाला कोई कानून नहीं है. हियरिंग सेंटर्स पर ऐसे लोगों से कई शिकायतें मिल रही हैं.
इन्हें इस आधार पर नोटिस मिले हैं, और वे इस तरह के मापदंड की कानूनी वैधता पर सवाल उठा रहे हैं.
जीवित होने के बावजूद मृत घोषित किया: ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि कुछ वोटरों को जीवित होने के बावजूद वोटर रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है. उन्होंने इन गलतियों को परेशानी कहा है.
साथ ही अधिकारियों से गड़बड़ियों को तुरंत ठीक करने की अपील की गई है.
इसके अलावा जिन्हें नोटिस भेजे गए हैं, उन वोटर्स से अपील करते हुए कहा है कि वह वेरिफिकेशन प्रोसेस को पूरा करने के लिए आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ अपने तय एसआईआर हियरिंग सेंटर्स पर तुरंत जाएं.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि AIMIM ने हियरिंग सेंटर्स पर हेल्प डेस्क बनाए हैं, ताकि लोगों को नोटिस समझने और दस्तावेज तैयार करने में मदद मिल सके.
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📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
ओवैसी ने तेलंगाना में चल रहे SIR (सामुदायिक इन्फ्रास्ट्रक्चर रिव्यू) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। यह विषय सरकार द्वारा सार्वजनिक सेवाओं के सुधार के लिए चलाए जा रहे एक पहल से जुड़ा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाती है कि सांसद ने प्रक्रिया में मौजूद त्रुटियों और देरी पर प्रकाश डाला है, और 21 दिन की समय सीमा को चार हफ्ते तक बढ़ाने की मांग की है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो आम जनता को अधिक समय मिलेगा अपनी शिकायतें दर्ज करने और निर्णय लेने के लिए, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।