राजनीति

ओवैसी का यूपी CM को चैलेंज- 'योगी आदित्यनाथ संभल से चुनाव लड़ लें, इंशाअल्लाह...'

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 13 अक्टूबर 2026 👁️ 2 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
ओवैसी का यूपी CM को चैलेंज- 'योगी आदित्यनाथ संभल से चुनाव लड़ लें, इंशाअल्लाह...'

यूपी में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं. नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने सपा और बीजेपी दोनों पर जमकर हमला बोला.

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में सबसे बड़ा मुद्दा आज राम मंदिर की चोरी का है.

करोड़ों रुपए चोरी कर लिए गए, जो हजारों करोड़ तक पहुंचते हैं.

ओवैसी ने कहा कि जो आरोपी जेल में हैं, वो बेल पर निकलने की बात कर रहे हैं और जो असल चोरी किए, वो तो बाहर आराम से घूम रहे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि SIT की रिपोर्ट जनता के सामने है तो यह वहां पर एक नूरा कुश्ती हो रही है और कोई कह रहा है कि अयोध्या आ जाओ, कोई कह रहा है तुम आ जाओ.

संभल से चुनाव लड़ लें योगी- ओवैसी

यूपी सीएम पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि हमने कहा है कि योगी आदित्यनाथ को चाहिए कि वो संभल से चुनाव लड़ लें.

संभल में जाकर कहें कि हमने मस्जिद को तोड़ दिया आपकी और उसपे मुझे वोट दो और इंशाअल्लाह जनता वहां पर उनको और मजलिस के जो हमारे जिम्मेदार हैं हरा देंगे.

गोरखपुर से लड़ें अखिलेश- ओवैसी

उन्होंने आगे कहा कि अखिलेश गोरखपुर से जाकर लड़ें और बोले कि मैंने उसको अपना राज्यसभा का कैंडिडेट बनाया है जिसके पिताजी ने झारखण्ड में इंडिया अलायंस के कैंडिडेट को हराया और मेरा विधायक मेरा कैंडिडेट वो है जिसने नरेंद्र मोदी को अपने 25 साल राजनीति की मुबारकबाद दी और जो गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के सदर हैं, तो अखिलेश यादव को मालूम हो जाएगा.

ओवैसी ने कहा कि अखिलेश यादव उस बिल्ली की तरह हैं, जो जब दूध पीती है और समझती है कि दुनिया नहीं देख रही है लेकिन दुनिया ने देख लिया कि अखिलेश यादव किसका दूध पी रहे हैं.

इसील

📡 स्रोत: ABP Live

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

ओवैसी का यह बयान आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में है, जहाँ राजनीतिक दलों के बीच टकराव तेज हो रहा है। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रमुख दलों के नेताओं पर सीधे आरोप लगाती है और धार्मिक मुद्दों को चुनावी मंच पर लाती है। यदि यह कथन व्यापक रूप से स्वीकार किया गया, तो यह चुनावी माहौल को और भी ध्रुवीकरण कर सकता है, जिससे मतदाताओं के बीच अस्थिरता और मतभेद बढ़ सकते हैं।

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