पाड़ाशाह और पारस पत्थर नाटक का मंचन:गुना के पर्वाधिराज पर्युषण पर बड़े जैन मंदिर में आयोजन
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के मौके पर पाश्र्वनाथ बड़े जैन मंदिर में लोककथा पर आधारित रंगमंचीय नाटक ‘पाड़ाशाह और पारस पत्थर’ का मंचन किया गया। वीर शासन ग्रुप के तत्वावधान में विनर सोसायटी आर्ट एंड कल्चर की ओर से यह प्रस्तुति दी गई। नाटक देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। पूरी प्रस्तुति के दौरान दर्शक कथा, संवाद और भावनात्मक प्रसंगों से जुड़े रहे।
भक्ति और मानवीय मूल्यों पर आधारित कहानी ‘पाड़ाशाह और पारस पत्थर’ सिर्फ किसी चमत्कारी पत्थर की कहानी नहीं है। नाटक में भक्ति, करुणा, संयम, त्याग और लोककल्याण जैसे मानवीय मूल्यों को दिखाया गया। नाटक का मुख्य पात्र पाड़ाशाह मेहनत, ईमानदारी और जीवों के प्रति करुणा को अपने जीवन का आधार मानता है।
अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा से प्रेरित होकर वह जैन मंदिर बनाने का संकल्प लेता है। उसके लिए मंदिर केवल पूजा की जगह नहीं, बल्कि शांति, नैतिकता और साथ रहने का प्रतीक है। पाड़ाशाह की सेवा भावना और सरल व्यवहार के कारण लोगों में उसके प्रति सम्मान बढ़ता है। लोग अपनी समस्याएं और दुख लेकर उसके पास पहुंचने लगते हैं।
उसकी बढ़ती लोकप्रियता सत्ता के सामने सवाल खड़ा करती है। यहीं से नाटक में आम लोगों और सत्ता के बीच का टकराव सामने आता है। राजा का दरबार और सत्ता से टकराव दिखाया नाटक में राजा का दरबार, दरबारियों की साजिश, पाड़ाशाह और सत्ता के बीच संवाद, स्त्री की आवाज के जरिए सामने आती सच्चाई और पारस पत्थर से जुड़ी लोकमान्यता को दिखाया गया।
कई भावनात्मक प्रसंगों के दौरान दर्शक शांत होकर कथा से जुड़े रहे। प्रभावशाली संवादों पर दर्शकों ने जोरदार प्रतिक्रिया भी दी। ‘सच्चा पारस मनुष्य के भीतर’ नाटक का संदेश रहा कि सच्चा पारस बाहर खोजने की चीज नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर की वह चेतना है, जो लोभ को त्याग, क्रोध को क्षमा, हिंसा को अहिंसा और संग्रह को सेवा में बदल देती है।
नाटक के लेखक और निर्देशक मधुर जैन ने बताया कि यह नाटक किसी चमत्कार की कहानी नहीं है। यह ऐसे इंसान की कहानी है, जो अपनी भक्ति और सरलता से समाज को दिशा दे सकता है।
📡 स्रोत: NewsData.io