पढ़ाई का दबाव और मोबाइल की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रही भारी, विशेषज्ञों ने बताए तनाव से बचने के उपाय
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर कुचामन के पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में जागरूकता सेमिनार, चिकित्सकों ने कहा-अच्छे अंकों की होड़ में सेहत से समझौता न करें, परेशानी होने पर खुलकर करें बात
डीडवाना-कुचामन,10 अक्टूबर। पढ़ाई का दबाव, अच्छे अंक लाने की चिंता, मोबाइल की बढ़ती लत और भविष्य को लेकर असमंजस आज बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के सामने बड़ी चुनौतियां बन रहे हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समय पर सही मार्गदर्शन की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी उद्देश्य से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कुचामन सिटी स्थित पीएम श्री केंद्रीय जवाहर नवोदय विद्यालय में विशेष जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को तनाव से बचने, मानसिक परेशानियों को पहचानने और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के बारे में जानकारी दी।
सेमिनार में राजकीय जिला चिकित्सालय, कुचामन के मस्तिष्क एवं मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र कुमार जिलोया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई के दौरान तनाव महसूस होना सामान्य है, लेकिन इसे खुद पर हावी नहीं होने देना चाहिए। अच्छे अंक लाने की चिंता में विद्यार्थियों को अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, सकारात्मक सोच और पढ़ाई के बीच जरूरी विश्राम तनाव को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकते हैं। विद्यार्थियों को समझाया कि मानसिक परेशानी होने पर उसे छिपाने या अकेले सहने के बजाय परिवार के सदस्यों, शिक्षकों अथवा विशेषज्ञ चिकित्सकों से खुलकर बात करनी चाहिए।
समय पर मदद लेने से परेशानी को समझने और उसका उचित समाधान खोजने में सहायता मिलती है। उन्होंने मोबाइल के संतुलित इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को स्क्रीन पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने के बजाय पढ़ाई, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय निकालना चाहिए। चिकित्सकों ने योग और खेलकूद को भी स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
नियमित शारीरिक गतिविधियां शरीर को स्वस्थ रखने के साथ मन को तरोताजा रखने और तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ पर्याप्त आराम, मनोरंजन और मानसिक सुकून भी जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। डॉ. जिलोया ने सरल भाषा में उनके सवालों के जवाब देकर जिज्ञासाओं का समाधान किया।
संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि मानसिक परेशानी महसूस करना कमजोरी नहीं है और जरूरत पड़ने पर सहायता मांगना एक सकारात्मक कदम है। सेमिनार में राजकीय जिला चिकित्सालय, कुचामन के डॉ. गौरव राजावत ने मोबाइल के अत्यधिक उपयोग, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य और संक्रामक रोगों से बचाव के संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी अपनी भागीदारी निभाई और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझा। छात्रा लक्षिता चौधरी, छात्र विवेक मीणा और छात्रा रुद्राक्षी ने इस विषय पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों ने माना कि पढ़ाई के दबाव के बीच मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।
उन्होंने अपने साथियों को भी मोबाइल का सीमित उपयोग करने, योग और खेलकूद को दिनचर्या में शामिल करने तथा परेशानी होने पर परिजनों और शिक्षकों से बात करने का संदेश दिया। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर आयोजित इस सेमिनार ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि स्वस्थ भविष्य की नींव स्वस्थ मन से तैयार होती है।
पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन के लिए केवल मेहनत ही नहीं, बल्कि संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, सकारात्मक सोच और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है।
बाइट 1: डॉ. सुरेंद्र कुमार जिलोया, मनोरोग विशेषज्ञ
बाइट 2: लक्षिता चौधरी, छात्रा
बाइट 3: विवेक मीणा, छात्र
बाइट 4: रुद्राक्षी, छात्रा