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पद्मश्री संत रमेश बाबा के ब्रह्मलीन होने से ब्रज में शोक की लहर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 6 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पद्मश्री संत रमेश बाबा के ब्रह्मलीन होने से ब्रज में शोक की लहर

बरसाना के पद्मश्री से सम्मानित ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा महाराज के ब्रह्मलीन होने की खबर से बरसाना समेत पूरे ब्रज में शोक की लहर दौड़ गई। संत रमेश बाबा ने अपना संपूर्ण जीवन श्रीराधारानी की भक्ति, गौसेवा और ब्रज की प्राकृतिक एवं धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया।ब्रज के संत समाज, साधु-संतों, ब्रजवासियों और श्रद्धालुओं ने उनके ब्रह्मलीन होने पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

संत रमेश बाबा ब्रज की संस्कृति, परंपरा, गौसेवा तथा ब्रज की पहाड़ियों और कुंडों के संरक्षण के लिए लंबे समय तक सक्रिय रहे।उनकी साधना और सेवा का प्रमुख केंद्र बरसाना स्थित मान मंदिर और गहवर वन रहा। ब्रज के प्रति उनके समर्पण के कारण देश-विदेश में उनके अनुयायी और श्रद्धालु रहे हैं।संत रमेश बाबा के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार 7 अक्टूबर 2026 को प्रातः लगभग 10 बजे गहवर वन स्थित उनकी तपस्थली में किया जाएगा।

उनके ब्रह्मलीन होने से ब्रजभूमि ने अपने एक ऐसे संत को खो दिया है, जिनका जीवन श्रीराधा नाम, ब्रजभक्ति और गौसेवा के लिए समर्पित रहा।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।