पगड़ी पहने गणपति बप्पा से सजे कानपुर के पंडाल:बिना कलर मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनीं पहली पसंद, इस बार बदला बप्पा का अंदाज
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →कानपुर में गणेश चतुर्थी के साथ ही गणपति बप्पा के स्वागत में घरों से लेकर पंडाल सजाकर भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। इस बार गणेश प्रतिमाओं में भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिखाई दे रहा है। मूर्ति बाजार में मिट्टी से बनी ऐसी गणेश प्रतिमाओं की खास डिमांड है, जिन पर किसी तरह का कलर ही नहीं किया गया है। श्रद्धालु इन प्रतिमाओं को घर में स्थापित करने के बाद आसानी से घर पर ही विसर्जित कर सकेंगे। देखिए 3 तस्वीरें...
पगड़ी वाले बप्पा बने आकर्षण का केंद्र मूर्ति कलाकारों ने श्रद्धालुओं की पसंद और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की प्रतिमाओं के कई आकर्षक स्वरूप तैयार किए हैं। बाजार में बिना रंग वाली प्राकृतिक मिट्टी की मूर्तियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। इसके अलावा इस बार मुंबई पैटर्न की पगड़ी पहने गणपति बप्पा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
पगड़ी, मोरपंख और आभूषणों से सजे बप्पा इस बार गणेश प्रतिमाओं की सजावट पर विशेष जोर दिया गया है। सिंदूरी रंग, आकर्षक पगड़ी, मोरपंख, स्टोन वर्क, मोतियों और आभूषणों से सजी प्रतिमाएं बाजार में दिखाई दे रही हैं। कई प्रतिमाओं में भगवान गणेश को पारंपरिक मुद्रा के बजाय शाही अंदाज में सजाया गया है।
खास तौर पर पगड़ी वाली प्रतिमाओं की मांग तेजी से बढ़ी है। घरों में गणपति की स्थापना करने वाले श्रद्धालु ऐसी प्रतिमाएं पसंद कर रहे हैं, जिन्हें पूजा के बाद आसानी से घर पर ही विसर्जित किया जा सके। इससे श्रद्धा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। मिट्टी की मूर्तियों की खास डिमांड गणेश प्रतिमा लेने पहुंचे संजू ने बताया कि वह पिछले 10 साल से लगातार घर में भगवान गणेश की स्थापना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हर साल वह गणपति की प्रतिमा का आकार थोड़ा बढ़ाते हैं। शुरुआत में छोटी प्रतिमा लाते थे, लेकिन अब करीब ढाई से तीन फीट या उससे बड़ी प्रतिमा लेकर आए हैं। उन्होंने बताया कि उनके लिए गणपति उत्सव सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का पर्व है। उनका मानना है कि वह हर साल गणपति बप्पा का स्वागत करते हैं और भगवान से की गई प्रार्थनाओं से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
उन्होंने बताया कि वह हमेशा मिट्टी की प्रतिमा ही घर लेकर आते हैं और पूजा के बाद घर पर ही उसका विसर्जन करते हैं। 5-6 महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी कलकत्ता के मूर्तिकार मनोज कुमार दास ने बताया कि इस बार बिना कलर वाली गणेश प्रतिमाओं की खास डिमांड है। श्रद्धालुओं को ऐसी मूर्तियां पसंद आ रही हैं, जो पर्यावरण के लिए भी बेहतर हों।
उन्होंने बताया कि उनका पूरा परिवार मूर्ति बनाने के काम से जुड़ा है और गणेश चतुर्थी के लिए करीब 5-6 महीने पहले से अलग-अलग स्वरूप की प्रतिमाएं तैयार करने का काम शुरू कर देते हैं। मनोज ने बताया कि हर साल श्रद्धालुओं की पसंद को देखते हुए कुछ नई डिजाइन की मूर्तियां तैयार की जाती हैं। इस बार गणपति बप्पा को पगड़ी पहनाकर नया स्वरूप दिया गया है, जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
उन्होंने बताया कि उनके यहां 100 रुपये से लेकर 7 हजार रुपये तक की गणेश प्रतिमाएं हैं। मुंबई पैटर्न की पगड़ी पहने गणपति बप्पा गणेश प्रतिमा लेने पहुंचीं आकृति गर्ग ने बताया कि उनके परिवार में पिछले 5 साल से लगातार भगवान गणेश की स्थापना की जा रही है। इस बार वह गणपति बप्पा को सात दिन के लिए घर में विराजित करेंगी।
उन्होंने बताया कि इस बार उन्हें खास तौर पर पगड़ी वाली गणेश प्रतिमा पसंद है। आकृति ने कहा कि उनका परिवार हर साल अलग-अलग डिजाइन की प्रतिमा लेकर आता है। पूजा के बाद घर पर ही विसर्जन करने के लिए वह मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता देती हैं। 25 सितंबर को बप्पा की प्रतिमाओं का होगा विसर्जन इस बार गणेश उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है।
शहर में अगले कई दिनों तक गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजेंगे। घरों और पंडालों में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना होगी। लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार घर में 3, 5, 7 या पूरे 10 दिनों के लिए गणपति की स्थापना करते हैं। इसके बाद विधि-विधान से प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। वहीं 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होगा।
इसी दिन श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन करेंगे।
📡 स्रोत: NewsData.io