राजनीति

Pakistan के साथ रक्षा समझौते पर Maldives की पूर्व रक्षा मंत्री Mariya Didi ने उठाए सवाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Pakistan के साथ रक्षा समझौते पर Maldives की पूर्व रक्षा मंत्री Mariya Didi ने उठाए सवाल

(मारिया दीदी) (संपादक: मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री मारिया दीदी द्वारा राष्ट्रपति मुइज्जू की हालिया पाकिस्तान यात्रा पर लिखा गया यह एक लेख है) माले, 29 अक्टूबर पाकिस्तान के साथ रक्षा और साइबर सुरक्षा संबंधों को मजबूत करते हुए, मालदीव को सहयोग से मिलने वाले तात्कालिक लाभ से आगे बढ़कर, क्षेत्रीय स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि पर इसके व्यापक प्रभावों के संबंध में विचार करना चाहिए।

मालदीव एक छोटा देश है, लेकिन रणनीतिक रूप से इसका महत्व अधिक है। हिंद महासागर के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थित होने, एक विशाल समुद्री क्षेत्र होने और काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर निर्भर अर्थव्यवस्था होने के कारण हमारा देश प्रमुख भू-राजनीतिक हितों के केंद्र-बिंदु पर स्थित है।

हमारे जैसे छोटे देश के लिए विदेश नीति का मतलब केवल दोस्ती बढ़ाना या समझौतों पर हस्ताक्षर करना नहीं है। इसका उद्देश्य अपनी संप्रभुता की रक्षा करना, अपने आर्थिक भविष्य को सुरक्षित रखना और यह सुनिश्चित करना कि बड़ी ताकतों के बीच की प्रतिद्वंद्विता हमारे लिए बोझ न बन जाए। राष्ट्रपति डॉ.

मोहम्मद मुइज्जू की 20 से 22 अक्टूबर तक की पाकिस्तान की राजकीय यात्रा की गहन समीक्षा की जानी चाहिए। इस दौरान दोनों देशों के बीच 20 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान हुआ था। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई। स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, व्यापार, कृषि और पर्यटन के क्षेत्रों में सहयोग से वास्तविक अवसर मिलते हैं।

हालांकि रक्षा, समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को लेकर हुए समझौते, भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार जारी तनाव के माहौल में मालदीव की रणनीतिक दिशा को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं। सवाल यह नहीं है कि मालदीव को पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने चाहिए या नहीं। पाकिस्तान के साथ संबंध रखना चाहिये।

पर, सवाल यह है कि क्या सरकार ने इन प्रतिबद्धताओं के हमारे राष्ट्रीय हितों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का उचित आकलन किया है?

रक्षा सहयोग: इसकी रणनीतिक कीमत क्या होगी? ------------------------------------------------- मालदीव के लिए समुद्री सुरक्षा बुनियादी रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमारी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि हमें अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी करने, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों से निपटने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने तथा आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता को विकसित करने की जरूरत है।

प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी और सूचनाओं के आदान-प्रदान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इन क्षमताओं को मजबूत किया जा सकता है। लेकिन रक्षा साझेदारियां भू-राजनीति से कभी पूरी तरह अलग नहीं होतीं। सैन्य प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी साझा करना, उपकरणों की खरीद और तकनीकी सहायता से ऐसी निर्भरता पैदा हो सकती है जो समझौतों पर हस्ताक्षर होने के काफी समय बाद तक बनी रहती है।

इसके परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि इसमें कौन-सी क्षमताएं शामिल हैं, क्या सुरक्षा उपाय किए गए हैं और इससे किस हद तक अभियानगत निर्भरता पैदा होती है। कश्मीर: जब चुप्पी कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है ---------------------------------------------------------------- पाकिस्तान में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तान के रुख और सिंधु जल संधि को लेकर उसकी चिंताओं का जिक्र किया।

‘अटोल टाइम्स’ की खबर के अनुसार राष्ट्रपति मुइज्जू ने इन टिप्पणियों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। कूटनीतिक चुप्पी को अपने आप सहमति नहीं मान लेना चाहिए। साथ ही, किसी नेता से यह अपेक्षा भी नहीं की जानी चाहिए कि वह एक संयुक्त कार्यक्रम के दौरान दिए गए हर विवादित बयान का सार्वजनिक रूप से जवाब दे।

भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है और सुरक्षा, आर्थिक विकास तथा क्षेत्रीय स्थिरता के मामले में एक अपरिहार्य साझेदार है। पूर्व में हुए महत्वपूर्ण संकट की स्थितियों जैसे कि नवंबर 1988 में तख्तापलट की कोशिश, 2004 में हिंद महासागर की सुनामी, 2014 में माले में जल संकट और कोविड-19 महामारी के दौरान, भारत की मदद इस रिश्ते के व्यावहारिक महत्व को दर्शाती है।

पाकिस्तान भी हमारा एक पुराना साझेदार है, जिसके साथ रचनात्मक संबंध बनाए रखने में हमारे वैध हित जुड़े हैं। साइबर सुरक्षा: रणनीतिक परिणामों वाला एक तकनीकी समझौता ------------------------------------------------------------------------ सूचना प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कौशल से संबंधित समझौता ज्ञापन (एमओयू) मालदीव की प्रौद्योगिकीय क्षमता को मजबूत करने के अवसर प्रदान करता है।

हमें प्रशिक्षित विशेषज्ञों, मजबूत सरकारी प्रणालियों और सरकारी रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन, संचार व्यवस्था तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए बेहतर उपायों की जरूरत है। हालांकि, साइबर सुरक्षा में सहयोग से लंबे समय तक बनी रहने वाली निर्भरता पैदा हो सकती है। फूंक-फूंक कर कदम रखना: रणनीतिक स्वायत्तता की राह में सतर्कता की चुनौती मालदीव के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।

पाकिस्तान लंबे समय से उसका साझेदार है और दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) का सदस्य भी है। भारत उसका सबसे करीबी पड़ोसी और समुद्री सुरक्षा, व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क तथा आपात स्थितियों में सहायता के लिहाज से एक महत्वपूर्ण साझेदार है। मालदीव को इन दोनों में से किसी एक को चुनना पड़े, ऐसी स्थिति नहीं आनी चाहिए।

लेकिन वह ऐसे फैसलों को नजरअंदाज करने का जोखिम भी नहीं उठा सकता, जो भविष्य में किसी संकट के दौरान उसके लिए ऐसा चुनाव करना मुश्किल बना सकते हैं। समझदारी इसी में है कि संकट पैदा होने से पहले ही स्पष्ट सीमाएं तय कर ली जाएं। रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनने का जोखिम ------------------------------------------------------------ देशों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल पारंपरिक सैन्य टकराव तक सीमित नहीं होती।

इसमें खुफिया गतिविधियां, साइबर अभियान, राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की कोशिशें और संवेदनशील जानकारी या रणनीतिक बुनियादी ढांचे तक पहुंच हासिल करने के प्रयास शामिल हो सकते हैं। हाल में जिन समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ है, उनका उद्देश्य छद्म अभियानों को सुविधाजनक बनाना है, इसका कोई प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

फिर भी, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को अनियंत्रित छोड़ने के संभावित परिणामों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। क्षेत्रीय अस्थिरता की आर्थिक कीमत --------------------------------------------- इस बहस का एक और पहलू भी है: हमारी अर्थव्यवस्था की कमजोरी। पर्यटन मालदीव की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में मालदीव में लगभग 22.5 लाख पर्यटक पहुंचे। यह क्षेत्र विदेशी मुद्रा अर्जित करता है, रोजगार के अवसर उपलब्ध कराता है और देश भर में कारोबार को सहारा देता है। हमारे रिसॉर्ट, गेस्टहाउस, एयरलाइन, रेस्तरां, परिवहन संचालक और छोटे कारोबार एक बुनियादी शर्त पर निर्भर हैं कि पर्यटकों को मालदीव की यात्रा सुरक्षित महसूस होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय यात्रा व्यावहारिक तथा किफायती बनी रहनी चाहिए।

क्षेत्रीय संघर्ष इन दोनों स्थितियों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। अस्थिरता से यात्रा मार्ग बाधित हो सकते हैं, विमानन और बीमा की लागत बढ़ सकती है, वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है और उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। इसके परिणाम सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल देशों से कहीं आगे तक फैल सकते हैं।

शांति एक राष्ट्रीय संपत्ति है --------------------------- मालदीव ने दशकों के प्रयास से एक शांतिपूर्ण और मेहमाननवाज पर्यटन स्थल के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। यह पहचान हमारी सबसे मूल्यवान राष्ट्रीय संपत्ति में से एक है। बड़े देश आपस में युद्ध करेंगे या नहीं, इस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।

लेकिन हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारी विदेश नीति हमें बेवजह उनके आपसी टकरावों में न उलझा दे। राष्ट्रपति मुइज्जू की पाकिस्तान यात्रा एक बुनियादी सवाल पूछने का अवसर देती है: क्या हमारी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां मालदीव को अधिक सुरक्षित, अधिक संकट-सक्षम और अपना भविष्य खुद तय करने में अधिक सक्षम बना रही हैं?

सवाल यह नहीं है कि मालदीव के मित्र होने चाहिए या नहीं। सवाल यह है कि क्या इस दोस्ती को इस तरह से निभाया जा रहा है जिससे हमारी संप्रभुता सुरक्षित रहे, हमारे काम करने की आजादी बनी रहे और हम अपने सभी पड़ोसियों के साथ रचनात्मक रूप से काम कर सकें। हिंद महासागर केवल रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र नहीं है।

मालदीव के लिए यह उसकी अर्थव्यवस्था, संपर्क और भविष्य की जीवनरेखा है। हमें द्विपक्षीय लाभ हासिल करने की कोशिश में उस शांति को दांव पर नहीं लगाना चाहिए, जिस पर हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और समृद्धि निर्भर है। भाषा _____________________________________________ (मारिया दीदी मालदीव की पूर्व रक्षा मंत्री हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

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