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पाकुड़ के स्कूल का बंजर जमीन बना आमदनी का स्रोत, सालाना 5 लाख रुपए तक हो रही आमदनी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पाकुड़ के स्कूल का बंजर जमीन बना आमदनी का स्रोत, सालाना 5 लाख रुपए तक हो रही आमदनी

पाकुड़ के स्कूल ने बंजर जमीन को बनाया आमदनी का स्रोत, फलदार और औषधीय पौधों की हो रही खेती, उत्पादन से सालाना 4 से 5 लाख रुपये की आमदनी, राशि से स्कूल में कमरे, चहारदीवारी और शौचालय का हुआ निर्माण, सामूहिक प्रयास से शिक्षा और पोषण को मिला बढ़ावा।

Short Headline: पाकुड़ के स्कूल का बंजर जमीन बना आमदनी का स्रोत, सालाना 5 लाख रुपए तक हो रही आमदनी

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पाकुड़ के स्कूल ने बंजर जमीन को बनाया आमदनी का स्रोत

फलदार और औषधीय पौधों की हो रही खेती उत्पादन से सालाना 4 से 5 लाख रुपये की आमदनी

राशि से स्कूल में कमरे, चहारदीवारी और शौचालय का हुआ निर्माण

सामूहिक प्रयास से शिक्षा और पोषण को मिला बढ़ावा

एंकर पाकुड़ जिले के झिकरहट्टी स्थित काली किंकर दत्ता मेमोरियल उच्च विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक खेती की मिसाल पेश कर रहा है। विद्यालय की बंजर जमीन पर फलदार और औषधीय पौधों की खेती की जा रही है, जिससे हर साल करीब चार से पांच लाख रुपये की आमदनी हो रही है। इस राशि का इस्तेमाल विद्यालय के विकास और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जा रहा है।

होल्ड अप साउंड रिपोर्ट

वीओ-1 पाकुड़ के झिकरहट्टी काली किंकर दत्ता मेमोरियल उच्च विद्यालय में करीब बारह सौ पचास विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय की जमीन का एक बड़ा हिस्सा एक समय में बंजर था, लेकिन अर्थव्यवस्था का आधार बन चुकी है। यहां कई फलदार वृक्ष और पौधे लगाए गए हैं। इनसे होने वाली आमदनी से विद्यालय का विकास हो रहा है।

बाइट- जीत घोष, छात्र बाइट- मनारुल शेख, केयरटेकर

वीओ-2 विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिलीप घोष ने बताया कि बंजर जमीन को उपयोगी बनाने के लिए विद्यालय प्रबंधन और ग्राम शिक्षा समिति की बैठक में अभिभावकों ने जमीन पर खेती करने का सुझाव दिया। सबों की सहमति से जमीन को खेती योग्य बनाया गया और फलदार तथा औषधीय पौधे लगाए गए। पौधों से होने वाली आमदनी से विद्यालय में तीन कमरों, चहारदीवारी, शौचालय और मुख्य द्वार का निर्माण कराया गया है।

बाइट- दिलीप घोष, प्रधानाध्यापक

वीओ-3 विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य केवल आमदनी बढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को पोषण और खेती के महत्व से भी अवगत कराना है। यहां उगाए जाने वाले फल और पौष्टिक उत्पाद प्रधानमंत्री पोषण योजना के उद्देश्यों को भी पूरा कर रहे हैं। फलों से हर साल करीब चार से पांच लाख रुपये की आमदनी होती है। ड्रैगन फ्रूट, अंजीर, आंवला और सपोटा जैसे फलों की खरीदारी के लिए पश्चिम बंगाल तक से भी व्यापारी पहुंचते हैं।

बाइट- अनीता पुरती, जिला शिक्षा पदाधिकारी

अंतिम वीओ इतिहासकार काली किंकर दत्ता की जन्मभूमि झिकरहट्टी में उनके नाम से संचालित यह विद्यालय सामूहिक प्रयास, नवाचार और संसाधनों के बेहतर उपयोग की मिसाल बन रहा है। बंजर जमीन को खेती योग्य बनाकर विद्यालय ने न केवल अपनी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

पाकुड़ से रामप्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।