राज्य

पंचकोष दृष्टि से युवाओं के समग्र विकास पर मंथन, उप मुख्यमंत्री बोले—शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी, विकास कार्यों का लाभ जेनज़ी और जेन अल्फा को भी मिलेगा

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पंचकोष दृष्टि से युवाओं के समग्र विकास पर मंथन, उप मुख्यमंत्री बोले—शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी, विकास कार्यों का लाभ जेनज़ी और जेन अल्फा को भी मिलेगा

अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ, युवाओं को सही दिशा देने पर जोर भोपाल, 5 सितंबर। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में ‘पंचकोष : समग्र व्यक्तित्व विकास की भारतीय दृष्टि’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कारों का होना भी जरूरी है। संस्कारों के बिना शिक्षा उस फूल की तरह है, जिसमें सुगंध न हो।

फोटो
फोटो

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में देश में हो रहे विकास कार्यों का व्यापक लाभ जेनजी और जेन अल्फा पीढ़ी को मिलेगा। भारत को 2047 तक विश्वगुरु और आर्थिक महाशक्ति बनाने का लक्ष्य रखा गया है और इसे साकार करने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए युवाओं का शिक्षित होने के साथ संस्कारवान होना आवश्यक है।

फोटो
फोटो

उन्होंने कहा कि पंचकोष समग्र व्यक्तित्व विकास की भारतीय दृष्टि युवाओं को संतुलित और सकारात्मक जीवन की दिशा देने में महत्वपूर्ण हो सकती है। अच्छे संस्कार, सांस्कृतिक मूल्य और सकारात्मक दृष्टिकोण युवाओं को अपने जीवन के लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

कार्यशाला में दिए जा रहे ज्ञान को विद्यार्थी अपने व्यवहार और जीवन में उतारें, तभी उसका वास्तविक लाभ मिलेगा। उप मुख्यमंत्री ने युवाओं से जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित करने के साथ आत्मसंतोष और संतुलन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सही दिशा और उद्देश्य का अभाव युवाओं को भटकाव की ओर ले जा सकता है।

उन्होंने युवाओं से देश विरोधी गतिविधियों और उन्हें पथ से विमुख करने वाले प्रयासों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि देश का युवा सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।

कार्यशाला में सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि सनातन परंपरा के मूल्य और वैदिक ज्ञान आज भी प्रासंगिक हैं। शरीर और मन के संतुलन के लिए योग, ध्यान और प्राणायाम उपयोगी हैं और दुनिया में तनाव प्रबंधन के लिए भी इनका उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से प्राचीन ज्ञान की सकारात्मक शिक्षाओं और मूल्यों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया। श्री शर्मा ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए शिक्षा व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी है। आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के लिए शिक्षा और संस्कृति के उत्थान पर ध्यान देना होगा।

विवेकानंद विश्वविद्यालय सागर के कुलगुरु डॉ. अजय तिवारी ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु अपने शिष्य को सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जब शिष्य अपने गुरु से आगे बढ़ता है, तो यही गुरु के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु राजेंद्र कुड़रिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिए नए अवसर उपलब्ध कराएगी। सहयोजक रामभूषण मिश्र ने कार्यशाला की रूपरेखा और गतिविधियों की जानकारी दी।

कार्यशाला के समापन पर कुलसचिव नीरजा नामदेव ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में गणमान्य नागरिकों, प्राध्यापकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।