पंधाना विधायक को राष्ट्रीय महिला आयोग की कार्यशाला का आमंत्रण:7-8 सितंबर को दिल्ली में ‘जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस’ पर चर्चा, आदिवासी-ग्रामीण महिलाओं के मुद्दे रखेंगी
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →खंडवा जिले की पंधाना विधानसभा क्षेत्र की विधायक छाया मोरे को राष्ट्रीय महिला आयोग ने दो दिनी क्षमता संवर्धन कार्यशाला में आमंत्रित किया है। देशभर की चुनिंदा महिला विधायकों के लिए आयोजित इस कार्यशाला में छाया निमाड़ के अलावा आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं से जुड़े मुद्दों और जमीनी अनुभवों को राष्ट्रीय मंच पर रखेंगी।
बता दें कि भारत सरकार के राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से 7 और 8 सितंबर को दिल्ली-एनसीआर के फरीदाबाद स्थित ताज सूरजकुंड रिजॉर्ट में कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला का विषय ‘जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस’ यानी लैंगिक संवेदनशील और समावेशी शासन है। आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर की ओर से जारी आमंत्रण पत्र में विधायक छाया मोरे को कार्यक्रम में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया है।
महिला नेतृत्व से लेकर नीति निर्माण तक होगी चर्चा दो दिवसीय कार्यशाला में देश के अलग-अलग राज्यों से चुनी गई महिला विधायकों की सहभागिता होगी। कार्यक्रम में महिला जनप्रतिनिधियों की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने के साथ उन्हें विधायी कार्यप्रणाली और प्रभावी शासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यशाला के दौरान जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस, नीति निर्माण, विधायी प्रक्रिया, प्रभावी संवाद, वार्ता कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और समावेशी सोच जैसे विषयों पर चर्चा होगी। महिला विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में काम करने के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों और अनुभवों को भी साझा करेंगी। पंधाना के आदिवासी क्षेत्र के मुद्दों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच छाया मोरे पंधाना विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है।
ऐसे में उनकी सहभागिता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि कार्यशाला के मंच से आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं की जमीनी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने का अवसर मिलेगा। पंधाना और निमाड़ क्षेत्र में महिलाओं से जुड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा, रोजगार, कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, सरकारी योजनाओं का लाभ, राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक सशक्तीकरण जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने पर भी रहेगा जोर जेंडर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस का उद्देश्य शासन और नीति निर्माण में महिलाओं की जरूरतों और परिस्थितियों को ध्यान में रखना है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे में पंधाना क्षेत्र के जमीनी अनुभवों के आधार पर यह भी चर्चा का विषय बन सकता है कि महिलाओं के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं को ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में अधिक प्रभावी तरीके से कैसे लागू किया जाए। खास बात यह है कि कार्यशाला में अलग-अलग राज्यों की महिला जन-प्रतिनिधियों के अनुभवों से सीखने और अपने क्षेत्र की चुनौतियों को राष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
📡 स्रोत: NewsData.io