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पांढुर्ना में गोबर से बने इको-फ्रेंडली उत्पादों की बढ़ी मांग, पांढुर्ना में गोबर के उत्पादों से महिलाओं को रोजगार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 7 नवंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पांढुर्ना में गोबर से बने इको-फ्रेंडली उत्पादों की बढ़ी मांग, पांढुर्ना में गोबर के उत्पादों से महिलाओं को रोजगार

दीपावली पर पांढुर्ना जिले में गोबर से बने इको-फ्रेंडली उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांढुर्ना में विभिन्न प्रदर्शनी और शासकीय स्टॉलों पर इनकी बिक्री की जा रही है। स्टॉलों पर गोबर से बनी लक्ष्मीजी की मूर्तियां, दीपक, फोटो फ्रेम, दीवार घड़ी और सजावटी सामग्री उपलब्ध हैं।

पांढुर्ना में इस पहल से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं पशुपालकों और किसानों के लिए भी गोबर आय का माध्यम बन रहा है। सामाजिक संस्थाओं और मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के सहयोग से तैयार इन उत्पादों को लोग पसंद कर रहे हैं। खास बात यह है कि पांढुर्ना में गोबर से बने दीपकों का उपयोग करने के बाद उन्हें गमलों और पौधों में विसर्जित किया जा सकता है।

----- बाइट – गोपाल कोठे, नवांकुर संस्था, पांढुर्ना

बाइट – अश्विनी कोठे, स्व-सहायता समूह, पांढुर्ना

बाइट – दिनेश पाटिल, समाजसेवी, पांढुर्ना बाइट – सुनीता वानखेड़े, गृहिणी, पांढुर्ना

💡 पृष्ठभूमि (Background)

पांढुर्ना जिले में गोबर से बने इको‑फ्रेंडली उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जो दीपावली के दौरान प्रदर्शनी और सरकारी स्टॉलों पर बिक रहे हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देती है, जिससे स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलकर आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है: लोगों को सस्ती, टिकाऊ वस्तुएँ मिलती हैं, रोजगार के नए स्रोत खुलते हैं, और

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।