पंजाब सरकार DA मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची:कहा-₹14191 करोड़ देना संभव नहीं, केंद्र से ज्यादा सैलरी दे रहे; मुलाजिम बोले-ये फिर मुंह की खाएंगे
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पंजाब सरकार ने मुलाजिमों को DA जारी करने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बैंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए स्पेशल लीव पिटीशन फाइल कर दी है। सरकार ने अपनी पिटीशन में साफ कह दिया कि मुलाजिमों को 15 दिन में 14191 करोड़ रुपए की राशि देना संभव ही नहीं है।
यही नहीं, सरकार ने अपनी पिटीशन में केंद्र सरकार और पंजाब सरकार के मुलाजिमों के वेतन के आंकड़ें भी दिए हैं। पंजाब सरकार की दलील है कि वो केंद्र सरकार से ज्यादा वेतन अपने मुलाजिमों को दे रही है। अगर डीए लागू किया तो मुलाजिमों की सेलरी और ज्यादा हो जाएगी।
अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट पंजाब सरकार की स्पेशल लीव पिटीशन को सुनवाई के लिए कब लिस्टेड करता है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करने से पहले मुलाजिमों का पक्ष भी जानेगा क्योंकि मुलाजिम पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केविएट फाइल कर चुके हैं।
उधर, साझा मुलाजिम मंच के अध्यक्ष सुखचैन सिंह खैहरा ने भी सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पूरा जवाब देने की बात कही है। उनका कहना है कि पंजाब सरकार को जिस तरह हाईकोर्ट की सिंगल बैंच और डबल बैंच में मुंह की खानी पड़ी है वैसे ही सुप्रीम कोर्ट में भी खानी पड़ेगी।
सुप्रीम कोर्ट बंगाल के मामले में भी अपना आदेश सुना चुकी है और उसी आदेश के आधार पर हाईकोर्ट ने भी फैसला दिया है। पंजाब सरकार ने पिटीशन में दी ये 7 अहम दलीलें... 1.
पंजाब के कर्मचारियों की सैलरी केंद्र से पहले ही ज्यादा सरकार का कहना है कि पंजाब के कर्मचारियों की बेसिक पे अधिक होने से उनका कुल टेक-होम वेतन कई केंद्रीय कर्मचारियों से ज्यादा है। 42% DA के साथ पंजाब में क्लर्क और कांस्टेबल को ₹54,812 मिलते हैं, जबकि केंद्र में 60% DA के बावजूद ₹36,960 मिलते हैं।
यानी पंजाब में वेतन 48% ज्यादा है। DA 60% होने पर पंजाब में यह वेतन ₹61,760 हो जाएगा, जो केंद्र से 67% ज्यादा होगा। 2. राज्य की 51% कमाई वेतन-पेंशन में खर्च हो रही सरकार के मुताबिक, पंजाब अपनी कुल राजस्व प्राप्ति का करीब 51% सिर्फ वेतन और पेंशन पर खर्च करता है, जबकि प्रमुख राज्यों का औसत 38% है।
वेतन, पेंशन और कर्ज का ब्याज मिलाकर करीब 82% राजस्व खर्च हो जाता है। 2025-26 में वेतन-पेंशन का अनुमानित खर्च ₹58,064 करोड़ है। 3. केंद्र की तर्ज पर डीए देना कोई कानूनी बाध्यता नह
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar