न परमानेंट नौकरी, न पूरा वेतन... फिर भी दिव्यांग बच्चों की सेवा में दिन-रात जुटे बालाघाट हॉस्टल के 'देवदूत'

Balaghat Divyang Hostel: एक छोटा सा शहर बालाघाट, जहां पर एक उम्मीद का एक हॉस्टल है. यह मध्य प्रदेश शासन का उपक्रम है, जहां पर जिले भर से विशेष बच्चों अपना भविष्य की इमारत की बुनियाद बनाने के लिए आते हैं. इस होस्टल की बड़ी ताकत इसकी बिल्डिंग नहीं बल्कि यहां के शिक्षक है.
यह होस्टल के कर्मचारी नहीं बल्कि उन विशेष बच्चों के पालक है, जो अपनो से कई किलोमीटर दूर अकेले रहते हैं.
📡 स्रोत: News18 Hindi MP