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परमाणु बिजली परियोजना के संभावित सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 20 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
परमाणु बिजली परियोजना के संभावित सामाजिक व पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा

भास्कर न्यूज| बांका शंभूगंज प्रखंड के कुर्मा गांव में प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना को लेकर ग्रामीणों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें किसानों और ग्रामीणों ने परियोजना से जुड़े जमीन, पानी, खेती, पर्यावरण, सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। ग्रामीणों ने कहा कि परियोजना को लेकर निर्णय लेने से पहले स्थानीय लोगों की आशंकाओं और सवालों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

बैठक में परियोजना के संभावित सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने कृषि भूमि और जल संसाधनों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर सवाल उठाए। साथ ही खेती और ग्रामीण जीवन पर दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई। किसानों की जमीन और खेती की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं बैठक में संजय चौहान ने कहा कि विकास और रोजगार जरूरी हैं, लेकिन किसानों की जमीन, खेती और ग्रामीणों के हितों की कीमत पर विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास बढ़ाना है तो कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल समेत अन्य रोजगारपरक इकाइयों के विकल्पों पर भी विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे उद्योगों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकता है।

चौहान ने सवाल उठाया कि जब रोजगार और औद्योगिक विकास के कई विकल्प मौजूद हैं, तो बांका के कृषि क्षेत्र में परमाणु परियोजना स्थापित करने के सामाजिक, कृषि, पर्यावरणीय और सुरक्षा प्रभावों पर गंभीर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए। बैठक में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में परमाणु ऊर्जा से जुड़े अनुभवों का भी उल्लेख किया गया।

जापान के फुकुशिमा परमाणु हादसे का हवाला देते हुए ग्रामीणों ने परमाणु परियोजनाओं से जुड़े सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही। जर्मनी और लिथुआनिया में परमाणु संयंत्रों को बंद किए जाने के अनुभवों का भी उल्लेख किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि जमीन, पानी, खेती और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

बैठक में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी चिंताओं को सामने रखते हुए ग्रामीणों ने परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शी चर्चा की मांग रखी।

📡 स्रोत: NewsData.io

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