ऑपरेशन सिंदूर में शहीद के परिवार ने नहीं लिया सम्मान:पलवल में मूर्ति के ₹1.90 लाख के बिल अटके; अनावरण में विधायक-प्रशासन नहीं पहुंचे
ऑपरेशन सिंदूर के शहीद लांस नायक दिनेश शर्मा के परिजनों ने स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाला सम्मान लेने से इनकार कर दिया। परिवार का आरोप है कि शहीद की मूर्ति बनवाने में करीब 1.90 लाख रुपए खर्च किए गए, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी इस राशि के बिलों का भुगतान नहीं हुआ। परिवार का कहना है कि प्रशासन की ओर से जल्द भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक उन्हें केवल अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवार ने शहीद के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि 7 मई को शहीद की मूर्ति का अनावरण होना था। इसके लिए होडल के BJP विधायक हरेंद्र रामरतन को घर जाकर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, लेकिन न विधायक पहुंचे और न ही प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी आया। परिवार का सवाल है कि जब शहीद की मूर्ति के अनावरण में प्रशासन और जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे तो स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाला सम्मान लेने का क्या मतलब है। पत्नी बोली- CM की दो घोषणाएं भी पूरी नहीं हुई शहीद की पत्नी सीमा ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सैनी ने 15 मई 2025 को परिवार से मुलाकात के दौरान गांव मोहम्मदपुर का नाम बदलकर दिनेशपुर करने और शहीद के नाम पर पार्क बनाने की घोषणा की थी। दोनों घोषणाएं अब तक पूरी नहीं हुई हैं। परिवार ने स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखने और गांव के प्रवेश द्वार पर उनका नाम लिखने की भी मांग की थी। इनमें से केवल स्कूल का नाम बदला गया है।
DC के PA बोले- भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में DC डॉ. जयेंद्र छिल्लर के पीए ने बताया कि मूर्ति के बिलों के भुगतान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिला परिषद की ओर से बिलों का भुगतान किया जाना है। डीसी कार्यालय से फाइल जिला परिषद के सीईओ के पास भेज दी गई है। जल्द ही सभी बिलों का भुगतान कर दिया जाएगा। वहीं, शहीद परिवार के सम्मान लेने से इनकार करने की जानकारी होने से होडल SDM बलीना राणा ने इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यह शहीद के परिवार के लोग ही बता सकते हैं। विधायक हरेंद्र रामरतन ने कहा कि मैंने अपने निजी कोष से परिवार को 40 लाख रुपए की सहायता की। जिस दिन मूर्ति के अनावरण का प्रोग्राम था, उस दिन मेरे कहीं और प्रोग्राम पहले से तय थे। दूसरा, मुझे टाइम शेड्यूल का नहीं पता था। इस
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar