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परिवार में 200 साल बाद बेटी जन्मी, रथ में लाए:ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया, महाराष्ट्र के बीड़ का मामला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
परिवार में 200 साल बाद बेटी जन्मी, रथ में लाए:ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया, महाराष्ट्र के बीड़ का मामला

महाराष्ट्र के बीड़ जिले के परिवार ने दावा किया है कि उनके यहां 200 साल बाद बेटी का जन्म हुआ है। मंगलवार को बच्ची को सजे रथ में घर लाया गया। ढोल नगाड़ों से स्वागत हुआ। संगीत के बीच लोगों ने जश्न मनाया। परली वैजनाथ की रहने वाली कल्पना दहिफले ने 27 अगस्त को स्थानीय अस्पताल में बेटी को जन्म दिया था।

बेटी के जन्म से उनके पति ऋषिकेश और परिवार के लोग और रिश्तेदार काफी खुश हो गए। पैतृक वंश में बेटी नहीं बच्ची के दादा लिम्बाजी दहिफले भगवान प्राइमरी विद्यालय में हेडमास्टर हैं। उन्होंने कहा कि उनके सीधे पैतृक वंश में करीब 200 साल से कोई बेटी पैदा नहीं हुई थी।

लिम्बाजी दहिफले ने कहा कि परिवार में कन्यारत्न के आने से दो सदी से चली आ रही यह कमी पूरी हुई है। रंगोली, फूलों से की सजावट कल्पना को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दहिफले परिवार ने इस मौके को खास बनाने की तैयारी की। बच्ची को रोशनी से सजाए गए रथ में परिवार के इंदिरा नगर स्थित घर लाया गया।

इस स्वागत जुलूस में रिश्तेदार, पड़ोसी और शुभचिंतक शामिल हुए। रास्ते में लोग पारंपरिक ढोल की धुन पर नाचे और आतिशबाजी की। घर पहुंचने पर बच्ची का प्रवेश द्वार पर पारंपरिक आरती से स्वागत किया गया। इस दौरान वहां रंगोली, फूलों की सजावट और गुब्बारे लगाए गए थे।

बेटियां आशीर्वाद होती हैं-लिम्बाजी लिम्बाजी दहिफले ने कहा, बेटियां आशीर्वाद होती हैं, बोझ नहीं। बेटी का जन्म भी उतनी ही गरिमा, खुशी और उत्सव का हकदार है, जितना समाज आमतौर पर बेटों के जन्म पर मनाता है।

उन्होंने बताया कि इस मौके पर जलेबियां बांटकर खुशी मनाई गई। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें: बैतूल के परिवार में 34 साल बाद बेटी का जन्म:‘बेटी हुई है’ लिखी गाड़ियों का काफिला निकाला; बोले- आगे बढ़ाने में कमी नहीं छोड़ेंगे

मध्य प्रदेश के बैतूल शहर में मंगलवार को ‘बेटी हुई है’ लिखी तीन-चार गाड़ियों का काफिला लोगों का ध्यान खींचता रहा। यह किसी प्रचार का हिस्सा नहीं था, बल्कि प्रजापति परिवार में करीब 34 साल बाद बेटी के जन्म की खुशी में निकाला गया काफिला था। पढ़ें पूरी खबर…

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

यह खबर महाराष्ट्र के बीड़ जिले में 200 साल बाद पहली बार बेटी के जन्म की है। परिवार ने बच्चे को रथ में लाकर ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया। यह घटना पारंपरिक लिंगभेद के संदर्भ में महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से यहाँ पुरुष वंश को प्राथमिकता दी जाती थी। इस प्रकार का जन्म समाज में लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता बढ़ा सकता है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक हो सकता है; यह ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए प्रेरणा बन सकता है और समान अवसरों की मांग को बल दे सकता है।

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