पश्चिमी एशिया तनाव पर पेजेश्कियान से बोले PM मोदी - 'भारत...'
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ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिमी एशिया की मौजूद स्थिति पर भी चर्चा की.
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक कहा कि भारत युद्ध की बजाय हमेशा बातचीत और शांति से हर समस्या को सुलझाने में भरोसा रखता है और अपनी इस बात पर हमेशा कायम रहता है.
दोनों नेताओं की दो सप्ताह से भी कम समय में यह दूसरी मुलाकात है.
बतौर ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान की यह पहली भारत यात्रा है.
पेजेश्कियान का यह दौरा इसलिए अहम है क्योंकि यह ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से नए आर्थिक प्रतिबंध लागू किए जाने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ गया है.
ईरानी राष्ट्रपति से मीटिंग पर क्या बोले पीएम मोदी?
पेजेश्कियान से मुलाकात की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दी. पीएम मोदी ने लिखा, 'बिश्केक से दिल्ली तक हमारी सार्थक बातचीत जारी है.
ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से मिलकर बहुत खुशी हुई. यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि यह उनकी भारत की पहली यात्रा है. हमने भारत और ईरान की दोस्ती पर बात की.'
उन्होंने आगे लिखा, 'हमारा मानना है कि हमें लंबे समय तक चलने वाली और दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए. बैठक में क्षेत्र के मौजूदा हालातों पर भी चर्चा हुई.
भारत क्षेत्र में स्थाई शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.'
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में हिस्सा लेने के लिए दिया धन्यवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ब्रिक्स से संबंधित बैठकों में ईरान की नियमित और उच्च स्तरीय भागीदारी के लिए आभार जताया.
उन्होंने वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने में ब्रिक्स की क्षमता का जिक्र किया.
उन्होंने ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भाग ले
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ द्विपक्षीय बैठक में शांति और संवाद के महत्व पर बल दिया। यह विषय क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए महत्वपूर्ण है। खबर इसलिए अहम है क्योंकि भारत और ईरान के बीच सहयोग से मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बदल सकता है, जिससे न केवल दोनों देशों के हित प्रभावित होंगे, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर पड़ेगा। आम जनता पर इसका असर ऊर्जा कीमतों में बदलाव, विदेश नीति की स्पष्टता और