व्यापार

पशुपालकों के हित में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के ऐतिहासिक निर्णयः केवल सिंह पठानिया

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पशुपालकों के हित में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार के ऐतिहासिक निर्णयः केवल सिंह पठानिया

उप-मुख्य सचेतक ने दूध प्रोत्साहन राशि में वृद्धि के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभार

अक्तूबर 30, शिमला (हिमाचल प्रदेश): उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने प्रदेश सरकार द्वारा दूध उत्पादकों के लिए प्रोत्साहन राशि 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर करने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों से हजारों पशुपालक परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

उन्होंने कहा कि गैर-सरकारी डेयरी सहकारी समितियों से जुड़े पात्र दूध उत्पादकों को अब डीबीटी के माध्यम से 6 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि मिलेगी, जिसके लिए सरकार ने 14 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। पठानिया ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बना है, जिसने दूध खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था शुरू की है।

मुख्यमंत्री के प्रयासों से प्रदेश में गाय और भैंस के दूध की खरीद पर देशभर की तुलना में सर्वाधिक समर्थन मूल्य प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक वृद्धि करते हुए गाय के दूध का खरीद मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का खरीद मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया है।

इस निर्णय से प्रदेश के दूध उत्पादकों को औसतन 48.86 करोड़ रुपये प्रतिमाह का वित्तीय लाभ प्रदान किया जा रहा है, जो अब तक का सर्वाधिक लाभ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दूध खरीद एक लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर लगभग तीन लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गई है। वहीं, कांगड़ा ज़िला के ढगवार में करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है, जिसकी शुरुआती क्षमता 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन होगी।

इसके अतिरिक्त आगामी वर्षों में विभिन्न जिलों में दूध संग्रहण एवं प्रसंस्करण सुविधाओं को मजबूत करने के लिए 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उप मुख्य सचेतक ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा दूध उत्पादकों के हित में लिए निर्णयों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। दूध उत्पादकों की आर्थिकी में निरंतर इजाफा हो रहा है।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पशुपालक मिलाप चंद और अन्य अनेक किसानों ने उनसे व्यक्तिगत भेंट कर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया और अवगत करवाया कि किस तरह प्रदेश सरकार उन्हें संबल प्रदान कर रही है। पठानिया ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखकर इसे सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका के रूप में विकसित करना है।

दूध का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए इन कदमों से हिमाचल का डेयरी क्षेत्र लगातार मज़बूत हो रहा है तथा पशुपालकों के लिए आय के स्थायी और बेहतर स्रोत विकसित हो रहे हैं।

इन पहलों से न केवल पशुपालन व्यवसाय अधिक लाभकारी और आकर्षक बन रहा है, बल्कि युवाओं सहित अधिक से अधिक लोग इस पारंपरिक व्यवसाय की ओर लौटने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिल रही है, स्वरोज़गार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं तथा पशुपालकों को सम्मानजनक पहचान मिल रही है।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।