पटना नगर निगम ने अपने ही मेयर को भेजा नोटिस:SC के आदेश के बाद नगर निगम का एक्शन, आवासीय मकान में कॉमर्शियल गतिविधि चलाने का आरोप
पटना नगर निगम ने अपने ही मेयर सीता साहू को नोटिस भेजा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद निगम ने ऐसे प्रॉपर्टी मालिकों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है, जो आवासीय मकानों में बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे हो। इसकी चपेट में पटना मेयर भी आ गई है। अजीमाबाद अंचल की टीम ने बड़ी पटन देवी गली (महाराजगंज) स्थित उनके आवास पर नोटिस दिया है। निगम ने नोटिस में निर्धारित समय के भीतर लिखित जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा करने को कहा है। समय पर जवाब नहीं मिलने पर संबंधित पक्ष के पास कोई आपत्ति नहीं मानते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी। 26 हजार से अधिक मकानों को नोटिस नगर निगम ने शहर के सभी छह अंचलों में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान की है। इसके आधार पर 26,745 मकान मालिकों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। निगम ने प्रत्येक वार्ड में रोजाना 100 से अधिक नोटिस भेजने का लक्ष्य रखा है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई है। कोर्ट में पेश रिपोर्ट में पटना में आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल के 26,745 मामले सामने आने की जानकारी दी गई थी। कोर्ट ने इतनी बड़ी संख्या को अधिकारियों की लापरवाही का संकेत माना था। अबतक 12 हजार से अधिक लोगों को नोटिस दिया जा चुका है। हफ्तेभर में बाकी लोगों को नोटिस मिल जाएगा। नगर निगम की प्रॉपर्टी आईडी और सेल्फ असेसमेंट से तैयार सूची में बांकीपुर और कंकड़बाग अंचल में सबसे अधिक मामले मिले हैं। इन इलाकों में मिली व्यावसायिक गतिविधियां मुसल्लहपुर, बाजार समिति, कंकड़बाग, एसकेपुरी, गुलजारबाग, बड़ी पटन देवी गली, महाराजगंज, एजी कॉलोनी, पाटलिपुत्र कॉलोनी, कृष्णापुरी, लोदीपुर, आशियाना, विजय नगर, मंदिरी, दीदारगंज, गुरुगोविंद सिंह पथ, हरमंदिर गली और मारूफगंज समेत कई इलाकों में आवासीय परिसरों में व्यावसायिक गतिविधियां पाई गई हैं। 19 अगस्त से शुरू होगी सुनवाई नगर निगम के सफाई निरीक्षकों और सुपरवाइजरों ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया है। इसके बाद तैयार सूची अंचल कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर भी लगाई गई है। नोटिस पाने वाले लोगों के पक्ष और दस्तावेजों की समीक्षा के लिए 19 अगस्त से 10 सितंबर तक अंचलवार सुनवाई होगी। निगम के अनुसार, सुनवाई के दौरान यदि संबंधित भवन मालिक का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो सीलिंग और जुर्माने की कार्रवाई की जा सकती है। रिहाइशी इलाकों के सर्वे में खुली पोल नगर निगम ने रिहाइशी इलाकों का सर्वे कराया। उसमें सबसे पहले प्रॉपर्टी आईडी और सेल्फ असेसमेंट के आधार पर डिजिटल सूची तैयार की। इस दौरान पाया गया कि कई घरों में व्यावसायिक काम हो रहे हैं। रिहाइशी इलाकों में बड़ी संख्या में क्लिनिक, दुकानें और अन्य कार्यालय चल रहे हैं। आवासीय प्रॉपर्टी टैक्स देकर लोग व्यावसायिक गतिविधियां करवा रहे हैं और उसी हिसाब से कमाई भी कर रहे हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io