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पटियाला में करंट लगने से युवक की मौत:बिजली लाइन पर काम कर रहा था, यूपी का रहने वाला, 3 बच्चों का पिता

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 23 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पटियाला में करंट लगने से युवक की मौत:बिजली लाइन पर काम कर रहा था, यूपी का रहने वाला, 3 बच्चों का पिता

पटियाला की गोपाल कॉलोनी में 11 केवी बिजली की तारों पर काम कर रहे एक युवक की करंट लगने से मौत हो गई। इस हादसे के बाद बिजली के काम में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा और उन्हें दिए जाने वाले सुरक्षा उपकरणों पर कई सवाल उठ गए हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवक बिजली की तारों के बीच लटका दिख रहा है।

मृतक युवक की पहचान राहुल कुमार के तौर पर हुई है। राहुल उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के सलेमपुर खादर का रहने वाला था। वह पिछले करीब 3 महीने से पटियाला में काम कर रहा था। हादसे की खबर मिलने के बाद मौके पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए। 3 बच्चों का पिता था राहुल मृतक के परिवार वालों ने आरोप लगाया है कि जिस कंपनी के लिए राहुल काम कर रहा था, उसने उसे काम के दौरान जरूरी सुरक्षा उपकरण नहीं दिए थे।

परिवार ने ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सुरक्षा के सही इंतजाम होते तो शायद राहुल की जान बच सकती थी। राहुल अपने पीछे पत्नी और 3 बच्चों को छोड़ गया है। हादसे के बाद राहुल के शव को पटियाला के राजिंदरा अस्पताल लाया गया। मंगलवार को उसका पोस्टमार्टम किया गया। ठेकेदार बोला-जनरेटर से आए करंट से हुई मौत वहीं, ठेकेदार रौनक ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।

उसने कहा कि हादसे में उसकी कोई गलती नहीं है। ठेकेदार के अनुसार, युवक की मौत जनरेटर से आए करंट के कारण हुई। इस पूरे मामले को लेकर थाना कोतवाली के एसएचओ गुरप्रीत सिंह हांडा ने बताया कि राजिंदरा अस्पताल से पुलिस को सूचना मिल गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के बाद नियमों के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करवा ली है और मामले की जांच अभी जारी है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

राहुल की दुखद मृत्यु से यह स्पष्ट होता है कि बिजली कार्य में सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। हमें न केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी बल्कि उद्योग और सरकार की भूमिका को भी मजबूत करना चाहिए। सुरक्षित उपकरण, प्रशिक्षित कर्मी और नियमित निरीक्षण से ऐसे हादसे रोके जा सकते हैं। समाज को चाहिए कि वह सुरक्षा जागरूकता फैलाए, ताकि किसी की जान जोखिम में न पड़े और परिवारों को अनावश्यक शोक न सहना पड़े।

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