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‘पत्नी को दूसरों संग आपत्तिजनक पोजिशन में देखना’…अवैध संबंध नहीं:पटना हाईकोर्ट ने खारिज की तलाक की अर्जी, 'अवैध संबंध' के 4 आधार क्या हैं जानिए

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 15 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
‘पत्नी को दूसरों संग आपत्तिजनक पोजिशन में देखना’…अवैध संबंध नहीं:पटना हाईकोर्ट ने खारिज की तलाक की अर्जी, 'अवैध संबंध' के 4 आधार क्या हैं जानिए

सिर्फ पत्नी को किसी अन्य पुरुष के साथ 'आपत्तिजनक पोजिशन' में देख लेने से अवैध संबंध (व्यभिचार) साबित नहीं होता। 'आपत्तिजनक पोजिशन' और 'फिजिकल रिलेशन बनाना'- दोनों शब्दों के बीच बहुत बड़ा अंतर है। पटना हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दी। पूरा मामला क्या है, कैसे तय होता है अवैध संबंध, कोर्ट ने क्यों बरी किया; जानेंगे, बूझे की नाही में...। सवाल-1: आपत्तिजनक पोजिशन और तलाक का यह पूरा मामला क्या है?

जवाबः समस्तीपुर के रहने वाले युवक की शादी मधुबनी की युवती से 2 जुलाई 2006 को हुई थी। शादी के बाद पति-पत्नी दोनों बहुत खुश थे। 2010 में दोनों को एक बेटा भी हुआ। इसके बाद दोनों के बीच रिश्ते बिगड़ गए। पति के आरोपों के मुताबिक, पत्नी का अपनी बड़ी बहन के पति (जीजा) के साथ अवैध संबंध था। एक बार हमने दोनों को आपत्तिजनक पोजिशन में देख लिया।

इसका विरोध किया तो वह भड़क गई। फिर हमारे साथ क्रूरता करने लगी। मधुबनी फैमिली कोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को पत्नी की बातों को सही मानते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दी। फैमिली कोर्ट के इसी फैसले को पति ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी और तलाक की मांग की थी। जिसे 3 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।

और फैमिली कोर्ट के फैसले को ही बहाल रखा। सवाल-2: हाईकोर्ट ने क्या कहते हुए तलाक देने से इनकार कर दिया?

जवाबः 3 सितंबर 2026 को याचिका खारिज करते हुए जस्टिस बिबेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह ने कहा, 'आपत्तिजनक पोजिशन' और 'यौन संबंध बनाना' दोनों अलग-अलग चीजें हैं। याचिकाकर्ता शारीरिक संबंध (सेक्सुअल इंटरकोर्स) का कोई ठोस सबूत नहीं दे पाया।’ जस्टिस चौधरी और जस्टिस सिंह ने फैसला सुनाते हुए 5 बड़ी बातें कही… सवाल-3: …तो ‘अवैध संबंध’ कैसे साबित होगा?

जवाबः इस केस का फैसला सुनाते हुए पटना हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय 'हरगोविंद सोनी बनाम रामदुलारी- 1985' फैसले का जिक्र किया है। फैसले के पैराग्राफ-6 में कहा गया है कि अदालत में किसी पर अवैध संबंध (व्यभिचार) का आरोप लगाना और उसे साबित करना कानूनी रूप से बहुत ही कठिन है। चूंकि अवैध संबंध के मामलों में कोई सीधा सबूत (जैसे वीडियो या प्रत्यक्षदर्शी) मिलना लगभग असंभव होता है, इसलिए अदालतें मुख्य रूप से 4 तरह के साक्ष्यों पर भरोसा करती हैं...

सवाल-4: हिन्दू कपल के तलाक

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

इस खबर में पटना हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सिर्फ पत्नी को किसी अन्य पुरुष के साथ 'आपत्तिजनक पोजिशन' में देख लेना अवैध संबंध (व्यभिचार) साबित नहीं होता। अदालत ने तलाक की अर्जी को खारिज कर दिया, यह बताते हुए कि 'आपत्तिजनक पोजिशन' और शारीरिक संबंध के बीच बड़ा अंतर है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैवाहिक विवादों में साक्ष्य मानदंडों को स्पष्ट करता है और समाज में गलतफहमियों को दूर करता है। आम जनता पर इसका असर यह है कि लोगों को यह समझ में आएगा कि केवल दृश्य साक्ष्य से तलाक के दावे मजबूत

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