पेट्रोल डीजल फिर महंगा होना तय! सितंबर में कच्चे तेल का बिल 47% बढ़ा
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भारत में कच्चे तेल का आयात सबसे ज्यादा किया जाता है.
पिछले कुछ महीनों से ईरान में जंग चल है, जिसके कारण कच्चे तेल के आयात पर भी असर पड़ा.
लेकिन इसी बीच सितंबर 2026 में भारत में कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च सालाना आधार पर 47% बढ़ गया और इसके लिए 15.4 अरब डॉलर (करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये) खर्च किए गए.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा की कीमतों में तेजी इसके पीछे का बड़ा कारण रहे.
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के मुकाबले आयात की मात्रा में मामूली सी ही वृद्धि हुई.
सितंबर में कितना हुआ कच्चे तेल का आयात
सितंबर में भारत ने 2.17 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया, जो पिछले साल इसी महीने के 2.03 करोड़ टन के मुकाबले 7% ज्यादा रहा.
देश का खर्चा ना केवल तेल आयात बल्कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भी हुआ है. सितंबर में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 116.09 डॉलर प्रति बैरल रही. पिछले साल सितंबर में ये कीमत 69.61 डॉलर प्रति बैरल थी.
यानी तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ गया. कच्चा तेल भारत के सबसे बड़े आयातों में शामिल है.
रूस से खरीद रहा भारत कच्चा तेल
सितंबर में रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर रहा.
समुद्री व्यापार से जुड़ी डाटा कंपनी Kpler के मुताबिक, भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 35% रही.
भारत को कच्चा तेल सप्लाई करने वाले पांच प्रमुख देशों में रूस, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत शामिल हैं.
इन पांच देशों से भारत ने सितंबर में अपने कुल कच्चे तेल आयात का 70% हिस्सा खरीदा.
फिर बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
बता दें कि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है.
ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से देश का आयात खर्च बढ़ जाता है.
अब डाटा को देखते हुए लग रहा है कि आने वाले समय में पेट्रोल- डीजल की कीमतों में भी इजाफा होने वाला है.
इससे व्यापार घाटे प
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar