पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगी लिमिट हटाएगी सरकार, निजी कंपनियों को दिए निर्देश
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केंद्र सरकार ने कुछ दिनों पहले देशभर में निजी पेट्रोल-डीजल कंपनियों के आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल खरीदने की सीमा तय कर दी थी, जिसको अब सरकार हटाने की तैयारी कर रही है.
इसके लिए सरकार की तरफ से निजी तेल कंपनियों को निर्देश भी दे दिए गए हैं. इस बारे में पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने गुरुवार को जानकारी दी है.
दरअसल रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी निजी फ्यूल कंपनियों ने अपने पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित कर दी है.
इसकी वजह ईंधन को बाजार कीमत से कम दाम पर बेचने से हो रहा नुकसान बताया जा रहा है.
क्या बोले पेट्रोल सचिव?
इस बारे में बात करते हुए पेट्रोलियम सचिव ने कहा कि किसी भी कंपनी को ईंधन की बिक्री पर ऐसी सीमा लगाने की अनुमति नहीं है.
सरकार कंपनियों से इस बारे में बात करेगी और उन्हें बिक्री की सीमा हटाने के लिए कहा जाएगा.
उन्होंने ये भी कहा कि युद्ध के दौरान आई संकट की स्थिति से ये सीख मिली है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी एक ईंधन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.
देश के एनर्जी मिक्स में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ाना जरूरी है.
पेट्रोलियम मंत्री क्या बोले?
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG सिलेंडर बेचने पर नुकसान हो रहा है.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस संकट को लेकर भारत में अभी चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि ऊर्जा की कीमतों में हुई बड़ी बढ़ोतरी का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर काफी हद तक नहीं पड़ा है.
कितनी है बिक्री की लिमिट?
बता दें कि रिपोर्ट्स के मुताबिक जिओ बीपी के पेट्रोल पंप पर एक ग्राहक एक दिन में अधिकतम 50 लीटर डीजल खरीद सकता है.
वहीं, नायरा एनर्जी के पंपों पर ये सीमा अलग-अलग जगहों पर 70 से 200 लीटर तक है.
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📡 स्रोत: ABP Live Vyapar
💡 पृष्ठभूमि (Background)
पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगी सीमा हटाने का निर्णय सरकार ने लिया है। 29‑30 जुलाई को लागू की गई राष्ट्रीय सीमा को अब हटाया जा रहा है, जिससे निजी फ्यूल कंपनियों को बिना किसी सीमा के ईंधन बेचने की अनुमति मिलेगी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ईंधन की आपूर्ति में बाधा कम होगी और पेट्रोल पंपों पर लगी प्रतिबंधों का असर खत्म होगा। आम जनता के लिए इसका मतलब है कि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी, लंबी कतारें कम होंगी और परिवहन लागत में कमी की संभावना बढ़ेगी।