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पेट्रोल खत्म होते ही 1000000 बैरल रवाना, रूस कभी नहीं भूलेगा भारत का ये एहसान!

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पेट्रोल खत्म होते ही 1000000 बैरल रवाना, रूस कभी नहीं भूलेगा भारत का ये एहसान!

दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी तस्वीर उभर रही है जिसकी कल्पना शायद 2 साल पहले किसी ने नहीं की थी। जो रूस दुनिया का एनर्जी जॉइंट कहलाता है। जो यूरोप से लेकर एशिया तक को तेल सप्लाई करता है। आज वो खुद पेट्रोल के लिए भारत की तरफ देख रहा है।

भारत अब सिर्फ रूस से कच्चा तेल खरीद नहीं रहा बल्कि अब भारत रूस को पेट्रोल एक्सपोर्ट कर रहा है। पिछले दो महीनों में भारत ने रूस को करीब 10 लाख बैरल गैसोलिन यानी पेट्रोल भेजा है।

इसे भी पढ़ें: Donald Trump warns Iran: सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई, Tehran पर US का दबाव और बढ़ा दरअसल रूस के इस संकट की सबसे बड़ी वजह है यूक्रेन के सटीक और घातक ड्रोन हमले। पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने अपनी रणनीति बदली।

अब वो सिर्फ बॉर्डर पर नहीं लड़ा बल्कि रूस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी कि उसकी रिफाइनरीज पर बार-बार हमला कर रहा है। अब वोटक्सा की रिपोर्ट क्या कहती है वो जान लीजिए। दरअसल इसके मुताबिक अकेले जुलाई और अगस्त के महीने में रूस की रिफाइनरीज पर 32 हमले हुए।

यानी हर दूसरे दिन एक हमला और इन हमलों का नतीजा यह हुआ कि रूस का घरेलू पेट्रोल उत्पादन 70% गिर गया। कल्पना कीजिए जिस देश के पास तेल का भंडार हो वहां पेट्रोल पंप खाली होने लगे।

इसी कमी को पूरा करने के लिए मॉस्को ने विदेशों से पेट्रोल मंगाना शुरू किया और अगस्त में रूस का समुद्री मार्ग से पेट्रोल आयात 1.25 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस संकट की घड़ी में भारत एक प्रमुख मददगार बनकर उभरा।

इसे भी पढ़ें: ईरान ने बढ़ाया Diplomacy का हाथ, Trump बोले- Military Action का विकल्प अभी भी खुला भारत उन तीन देशों में शामिल है जिन्होंने अगस्त में रूस को पेट्रोल की सप्लाई की। अन्य दो देश तुर्की और मोरक्को हैं। लेकिन भारत की भूमिका सबसे खास है। यहां एक दिलचस्प सर्कुलर ट्रेड देखने को मिल रहा है।

भारत रूस से भारी मात्रा में सस्ता तेल खरीदता है। जून और जुलाई में भारत ने रूस से रोजाना 25 लाख बैरल कच्चा तेल इंपोर्ट किया। अब इसी कच्चे तेल को भारत की रिफाइनरीज में प्रोसेस किया गया और उससे जो पेट्रोल बना वही वापस रूस को एक्सपोर्ट किया जा रहा है।

यानी रूस का ही तेल भारत की रिफाइनरी और फिर रूस की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने North Korea और Iran के साथ बढ़ते सैन्य संबंधों का किया पुरजोर बचाव नायरा एनर्जी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रसनिफ्ट का करीब 50% हिस्सेदारी है।

यही वजह है कि जब रूस में पेट्रोल की किल्लत हुई तो वाडिनार रिफाइनरी ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। यह भारत के सामरिक और व्यापारिक कौशल का प्रमाण है कि हम ना केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर रहे हैं बल्कि एक वैश्विक ऊर्जा केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। लेकिन यह व्यापार इतना सीधा नहीं है।

पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से यह पूरा ऑपरेशन बेहद गुप्त तरीके से अंजाम दिया जा रहा है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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