पेट्रोल से प्याज तक, सोने से स्मार्ट फोन और हवाई टिकट से लेकर मिठाई तक, बढ़ गई महंगाई
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8 नवंबर को दिवाली है और बाज़ार सजने लगे हैं लेकिन इस बार खरीदारी की लिस्ट बनाते वक्त लोगों के माथे पर शिकन है.
वजह साफ़ है पिछले साल के मुकाबले इस बार ज़्यादातर चीज़ें महंगी हो चुकी हैं.
सरकारी आंकड़े भी यही कह रहे हैं. पिछली दिवाली के आसपास खुदरा महंगाई करीब 2 फीसदी थी.
अब अगस्त 2026 में यह 4.82 फीसदी पर पहुंच गई है.
रिज़र्व बैंक का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच, यानी ठीक त्योहारों के मौसम में महंगाई 5.9 फीसदी तक जा सकती है. इस महंगाई के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं -
पश्चिम एशिया की जंग
कमज़ोर मानसून
महंगा डॉलर
आइए एक एक करके समझते हैं.
पहली वजह - जंग ने बढ़ाया तेल का खर्च
इस साल फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में जंग छिड़ी और होर्मुज़ के समुद्री रास्ते पर असर पड़ा.
दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है.
नतीजा यह हुआ कि जंग से पहले करीब 72 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा कच्चा तेल अप्रैल में 141 डॉलर तक पहुंच गया. अभी भी यह करीब 96 से 98 डॉलर के आसपास है.
भारत अपनी ज़रूरत का करीब 85 फीसदी से ज़्यादा कच्चा तेल बाहर से खरीदता है इसलिए इसका सीधा असर हम पर पड़ा.
मई में पेट्रोल डीज़ल के दाम चार बार बढ़ाए गए और कुल मिलाकर करीब साढ़े सात रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई. अब दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीज़ल 95.20 रुपये प्रति लीटर है.
डीज़ल महंगा होने का मतलब है ढुलाई महंगी.
और जब ट्रक का किराया बढ़ता है तो सब्ज़ी से लेकर कपड़े तक हर सामान की कीमत पर असर आता है.
मिठाई की दुकानों और होटलों में इस्तेमाल होने वाला 19 किलो का कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी दिल्ली में 2,747.50 रुपये का हो गया है यानी इस बार मिठाई और नमकीन के दाम भी बढ़ सकते हैं.
थोक महंगाई के आंकड़े इस दबाव को और साफ़ दिखाते हैं.
अगस्त में थोक महंगाई 9.92 फीसदी रही जबकि ईंधन और बिजली वाले हिस्से में यह करीब 23 फीसदी रही
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar