इतिहास

पिपलानी की रामलीला में कैकेयी के वरदान और श्रीराम वनवास का भावपूर्ण मंचन, दर्शक हुए भावुक

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 15 अक्टूबर 2026 👁️ 3 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पिपलानी की रामलीला में कैकेयी के वरदान और श्रीराम वनवास का भावपूर्ण मंचन, दर्शक हुए भावुक

67 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही विविध कला विकास समिति, कैकेयी-मंथरा संवाद से लेकर राजा दशरथ के निधन तक के प्रसंगों ने बांधा समां

भोपाल। पिपलानी में विविध कला विकास समिति की रामलीला के 67वें वर्ष में कैकेयी-मंथरा संवाद, कोप भवन, राजा दशरथ-कैकेयी संवाद, श्रीराम वनवास और राजा दशरथ के निधन के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से रामायण के इन महत्वपूर्ण दृश्यों को मंच पर जीवंत कर दिया। मंचन के दौरान दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।

संस्था अध्यक्ष रूपेश तैलंग तथा वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्याम सुंदर, शिवप्रसाद साहू और अशोक शर्मा के निर्देशन में आयोजित रामलीला में मुख्य अतिथि थर्मल के महाप्रबंधक प्रदीप चंद्र कांडपाल, महाप्रबंधक जयदेव चटर्जी, थ्रिफ्ट सोसायटी के अध्यक्ष बसंत कुमार और फिल्म निर्माता मंजू गौतम उपस्थित रहे। महासचिव आर.एस. अरोरा ने अतिथियों का स्वागत किया।

मंथरा की बातों में आकर कैकेयी ने मांगे दो वरदान

रामलीला के इस प्रसंग में राजा दशरथ द्वारा श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा से नगर में उत्सव का माहौल बनता है। श्रीराम के राज्याभिषेक की खबर सुनकर दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इसके बाद मंथरा कैकेयी को भरत के भविष्य और राजगद्दी को लेकर उकसाती है। वह कैकेयी को राजा दशरथ से पूर्व में दिए गए दो वरदान मांगने की सलाह देती है।

मंथरा की बातों में आकर कैकेयी कोप भवन में चली जाती हैं। राजा दशरथ उन्हें मनाने पहुंचते हैं, लेकिन कैकेयी अपने दो वरदानों की याद दिलाते हुए भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लेती हैं। कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ व्यथित हो जाते हैं। इसके बाद श्रीराम के वनवास और दशरथ के निधन के प्रसंगों का मंचन किया गया।

रामलीला में तुलसीदास की चौपाई—

“नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकइ केरि।

अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि॥”

के माध्यम से मंथरा की भूमिका और उसके प्रभाव को प्रस्तुत किया गया।

कलाकारों ने अभिनय से दृश्यों को बनाया जीवंत

रामलीला के इन प्रसंगों का निर्देशन जी.आर. लिखितकर, रंजीत महाराणा, भावेश शर्मा, गोपाल टिकमे और दिजवेंद्र मंडल ने किया। कलाकारों ने संवाद, भाव-भंगिमा और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को रामायण के घटनाक्रम से जोड़ दिया।

श्रीराम की भूमिका लोकेश मौर्य, लक्ष्मण की मयंक प्रताप सिंह, सीता की मधुश्री पाठक, राजा दशरथ की शिवप्रसाद साहू, कौशल्या की नेहा प्रसाद, कैकेयी की मंजू वर्मा और मंथरा की भूमिका कृष परिहार ने निभाई।

इसके अलावा मंत्री की भूमिका देवांश तरण, इंद्र की गौरव पाटिल, सरस्वती की रोशनी पाटिल, बृहस्पति की प्रभात मेहरा और कुबेर की हेमंत शिंदे ने निभाई। अक्षय, लक्ष्मण पाटिल, राहुल पगारे, आदर्श मेहरा और अभिनव श्रीवास्तव सहित अन्य कलाकारों ने भी मंचन में अपनी भूमिकाओं से प्रभाव छोड़ा।

विविध कला विकास समिति की 67 वर्षों से चली आ रही रामलीला परंपरा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से दर्शकों को रामायण के आदर्शों से जोड़ रही है। कैकेयी के वरदान और श्रीराम के वनवास के प्रसंगों ने एक बार फिर दर्शकों को रामकथा के महत्वपूर्ण मोड़ का साक्षी बनाया।

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।