इतिहास

पिपलानी की रामलीला में राम जन्म से राम-परशुराम संवाद तक का भव्य मंचन, दर्शक हुए भावविभोर

लेखक: Santosh Yogi अंतिम अपडेट: 14 अक्टूबर 2026 👁️ 5 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पिपलानी की रामलीला में राम जन्म से राम-परशुराम संवाद तक का भव्य मंचन, दर्शक हुए भावविभोर

भोपाल। विविध कला विकास समिति द्वारा आयोजित पिपलानी की रामलीला के 67वें वर्ष में धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के तहत रामायण के विभिन्न प्रसंगों का भव्य मंचन किया गया। विष्णु लोक, रावण-वेदवती संवाद, राम जन्म, विश्वामित्र का आग्रह, धनुष यज्ञ, राम विवाह और लक्ष्मण-परशुराम संवाद जैसे प्रसंगों ने दर्शकों को आकर्षित किया। कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण की कथाओं को मंच पर जीवंत कर दिया।

समिति अध्यक्ष रूपेश तैलंग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्याम सुंदर, शिवप्रसाद साहू एवं अशोक शर्मा तथा कोषाध्यक्ष बाल्मीक सोनी के निर्देशन में आयोजन संपन्न हुआ। रामलीला के मीडिया प्रवक्ता अतुल मालवीय ने बताया कि रावण और वेदवती का संवाद रामायण की कथा का महत्वपूर्ण प्रसंग है, जो आगे चलकर माता सीता की कथा और रावण के विनाश से जुड़ता है।

मुख्य अतिथियों का किया स्वागत

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फेब्रिकेशन के महाप्रबंधक आलोक सेंगर, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के वरिष्ठ कमांडेंट शिव रतन सिंह मीणा तथा फीडर्स के महाप्रबंधक एस.ए. डोंगरे उपस्थित रहे। समिति के महासचिव आर.एस. अरोरा ने अतिथियों का स्वागत किया।

कलाकारों ने निभाईं प्रमुख भूमिकाएं

रामलीला में लोकेश मौर्य ने भगवान राम, मयंक प्रताप सिंह ने लक्ष्मण, अंगद बिहर ने सीता, कृष परिहार ने विश्वामित्र, लक्ष्मण पाटिल ने राजा जनक, हिम्मत राव पाटिल ने रावण, जगदीश गुप्ता ने परशुराम और राहुल करण ने बाणासुर की भूमिका निभाई।

कलाकारों ने संवाद, भाव-भंगिमाओं और अभिनय के माध्यम से राम जन्म से लेकर धनुष यज्ञ, राम विवाह और लक्ष्मण-परशुराम संवाद तक के प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ भारतीय पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को मंच के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

पिपलानी की रामलीला एक पारंपरिक धार्मिक नाटक है, जिसमें रामायण के प्रमुख प्रसंगों को रंगमंच पर जीवंत किया जाता है। यह कार्यक्रम 67वें वर्ष में आयोजित हुआ, जिसमें राम जन्म, रावण‑वेदवती संवाद, धनुष यज्ञ, राम विवाह और लक्ष्मण‑परशुराम संवाद जैसे प्रमुख दृश्य दिखाए गए। इस खबर का महत्व यह है कि यह सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित कर रहा है और स्थानीय कलाकारों को एक मंच प्रदान कर रहा है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है, क्योंकि यह लोगों में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकता की भावना को ब

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Santosh Yogi

संतोष योगी भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं जो भोपाल जिला एवं आसपास की घटनाओं को प्रमुखता से कवर करते हैं।