पिता बनाना चाहते थे वकील, एक्टर बनने पर खूब रोईं मां, किस्से अशोक कुमार के
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अशोक कुमार उन स्टार्स में शामिल रहे जिन्होंने हिंदी सिनेमा को उसके शुरुआती दौर में खास और अमिट पहचान दिलाई थी. 1930 के दशक के बीच में अपना एक्टिंग करियर शुरू करने वाले अशोक कुमार ने कई पीढ़ियों को एंटरटेन किया.
आज अभिनेता की बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौके पर चलिए उनसे जुड़ी कुछ खास बातें जानते हैं.
पिता बनाना चाहते थे वकील
अशोक कुमार का जन्म 13 अक्टूबर 1911 को बिहार के भागलपुर जिले में हुआ था.
घर में सब उन्हें 'दादामुनि' कहा करते थे और बाद में इंडस्ट्री के लोग भी उन्हें इसी नाम से पुकारने लगे थे. उनके पिता कुंजीलाल एक वकील थे और वो चाहते थे कि अशोक भी उनकी तरह वकालत में आए.
पिता की बात मनाते हुए अशोक ने इसके लिए प्रयास भी किया, हालांकि वो परीक्षा में फेल हो गए थे.
एक्टर बने तो मां रोने लगीं
अशोक कुमार बाद में अपनी बहन सती देवी के घर मुंबई आ गए थे. उनके पति शशाधर मुखर्जी बॉम्बे टॉकीज में काम करते थे. उनकी सिफारिश के बाद अशोक को असिस्टेंट की नौकरी मिल गई.
फिर उन्होंने साल 1936 में 'जीवन नैया' फिल्म से एक्टिंग डेब्यू किया. जब अशोक के घर पर ये लता चला कि वो एक्टर बन गए हैं तो घर पर बवाल मच गया. उनकी मां तो रोने लगी थीं.
क्योंकि घर वाले फिल्मों में काम करने के पेशे को अच्छा नहीं मानते थे.
एक करोड़ कमाने वाली पहली फिल्म अशोक कुमार ने ही दी
अशोक कुमार को साल 1943 की फिल्म 'किस्मत' से गजब की लोकप्रियता मिली थी.
इस मूवी में उन्होंने एंटी-हीरो का रोल अदा किया था. इसने एक करोड़ रुपये का कलेक्शन करके खूब सुर्खियां बटोरी थीं. ये तब बॉलीवुड की पहली एक करोड़ रुपये कमाने वाली फिल्म बनी थी.
इसके बाद अशोक कुमार को लेकर फैंस के बीच गजब की दीवानगी देखने को मिलती थी. कई लोग उन्हें बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार भी मानते
📡 स्रोत: ABP Live Film