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पित्रोदा बोले- गरीब-दलित, अल्पसंख्यकों की बात करना दिमागी नक्सल नहीं:मुस्लिम-ईसाई, यहूदी और बौद्धों से पूछिए भारत में कैसा महसूस करते हैं

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 1 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पित्रोदा बोले- गरीब-दलित, अल्पसंख्यकों की बात करना दिमागी नक्सल नहीं:मुस्लिम-ईसाई, यहूदी और बौद्धों से पूछिए भारत में कैसा महसूस करते हैं

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के चेयरमैन सैम पित्रोदा ने पीएम मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और केंद्र सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर कहा कि गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों के पक्ष में बोलना नक्सलवाद या कम्युनिज्म नहीं है।

पित्रोदा ने इसे बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इंसानियत को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए और सभी लोग एक ही जगह से आए हैं। वहीं RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर उन्होंने कहा कि मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और यहूदी लोगों से पूछना चाहिए कि वे आज भारत में कैसा महसूस करते हैं।

भागवत के बयान पर भी सवाल उठाए RSS प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पित्रोदा ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों के लोगों से सीधे पूछा जाना चाहिए कि वे आज देश में खुद को कैसा महसूस करते हैं।

उन्होंने मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और बौद्ध सैमुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि सिर्फ यह कहना काफी नहीं है कि सभी का सैम्मान किया जाता है। अगर व्यवहार में इसके उलट होता है तो कथनी और करनी में अंतर दिखाई देता है। पित्रोदा ने कहा कि किसी के बारे में कही गई बातों से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके साथ किया जाने वाला व्यवहार है।

उनके मुताबिक वास्तविक स्थिति सैमझने के लिए लोगों के अनुभवों को देखना जरूरी है। ‘2014 से पहले बनी चीजों का फायदा आज मिल रहा’ पित्रोदा ने 2014 से पहले की सरकारों के काम का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि आज देश में जो कई सुविधाएं और संस्थान दिखाई दे रहे हैं, उनमें से बड़ी संख्या पिछले 70 वर्षों में तैयार हुई।

उन्होंने IIT और IIM जैसे संस्थानों से निकलने वाली प्रतिभाओं का उदाहरण दिया। पित्रोदा के मुताबिक इन संस्थानों से निकले लोग आज दुनियाभर में काम कर रहे हैं और यह देश के शुरुआती नेतृत्व द्वारा तैयार की गई व्यवस्था का परिणाम है।

उन्होंने माना कि पहले की सरकारों से भी गलतियां हुई होंगी, लेकिन उनके अनुसार देश में बड़ी संख्या में संस्थान और व्यवस्थाएं खड़ी की गईं। उन्होंने सवाल उठाया कि 2014 के बाद पिछले 14 वर्षों में ऐसे कौन से बड़े नए संस्थान बनाए गए, जिनकी तुलना उस दौर की संस्थागत विरासत से की जा सके।

GDP की 7.8% ग्रोथ पर उठाया सवाल भारत की पहली तिमाही की 7.8% GDP ग्रोथ पर भी पित्रोदा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सिर्फ GDP बढ़ना ही पर्याप

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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