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पीयूष गोयल बोले- सिर्फ GDP की आलोचना करने वाले बेरोजगार:बेस ईयर की तुलना कर लोगों को गुमराह कर रहे; पहले रघुराम राजन ने उठाए थे सवाल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 2 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
पीयूष गोयल बोले- सिर्फ GDP की आलोचना करने वाले बेरोजगार:बेस ईयर की तुलना कर लोगों को गुमराह कर रहे; पहले रघुराम राजन ने उठाए थे सवाल

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि जो लोग GDP की आलोचना कर रहे हैं, देश में सिर्फ वही बेरोजगार हैं। दिल्ली में ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसीएमए) की बैठक में गोयल ने कहा कि आलोचक लोगों को गुमराह कर रहे हैं। गोयल ने कहा- मैं टीवी पर कुछ विपक्षी नेताओं को देखता हूं।

संभव है कि इनमें पूर्व वित्त सचिव या पूर्व आरबीआई गवर्नर भी शामिल हों, जो दोनों भारत में अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। उन्हें एक जैसे आंकड़ों की तुलना करना भी नहीं आता। पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने न्यूज एजेंसी PTI से मंगलवार को कहा था कि, “क्या ये GDP के आंकड़े सही हैं?

अगर आंकड़े सही नहीं हैं तो पूरी अर्थव्यवस्था पर भी सवाल उठता है।” दरअसल, सोमवार को सरकार ने अप्रैल-जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े जारी किए थे, जो 7.8% रही। RBI का अनुमान 7% था। एक साल पहले की इसी तिमाही में यह 6.9% थी।

गोयल बोले- विपक्ष के पास सिर्फ टीवी पैनल पर आने का काम बचा है गोयल ने कहा कि वे यह पचा नहीं पा रहे हैं कि वे खुद ही एकमात्र बेरोजगार लोग बचे हैं। उनके पास बचा एकमात्र काम टीवी पैनल पर जाना और तर्क गढ़ना और बनाना है। आंकड़ों का बचाव करते हुए मंत्री ने कहा- सत्य को छिपाया नहीं जा सकता।

जब आपकी मानसिकता इतनी नकारात्मक होती है, तो एक तरह से आप खुद को छोटा कर रहे होते हैं। इकोनॉमी की सेहत बताती है GDP GDP यानी देश के भीतर एक तय समय में कितनी वैल्यू का सामान बना और कितनी सर्विसेज दी गईं। इसे देश की आर्थिक सेहत का 'रिपोर्ट कार्ड' भी कह सकते हैं।

इसमें भारतीय कंपनियां ही नहीं, बल्कि देश में काम करने वाली विदेशी कंपनियों का प्रोडक्शन भी जोड़ा जाता है। दो तरह की GDP: रियल और नॉमिनल रियल जीडीपी: इसमें सामान और सेवाओं की कीमत बेस से तय की जाती है। अभी तक इसका साल 2011-12 था। इससे पता चलता है कि देश में उत्पादन सच में बढ़ा है या नहीं।

नॉमिनल जीडीपी: यह मौजूदा बाजार भाव पर आधारित होती है। इसमें महंगाई भी शामिल होती है। अगर चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, तो नॉमिनल जीडीपी भी बढ़ी हुई दिखेगी। कैसे की जाती है जीडीपी की गिनती?

जीडीपी निकालने के लिए एक खास फॉर्मूले का इस्तेमाल होता है: $GDP = C + G + I + NX$ C (कंजम्प्शन): यानी हम और आप जो अपनी जरूरतों पर खर्च करते हैं। G (गवर्नमेंट): सरका

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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