प्लांट लगाने से लेकर सब्सिडी तक क्या हैं गोवर्धन योजना के नए नियम? 5 प्वॉइंट्स में समझें
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अगर आप गांव में रहते हैं और गोबर, पराली या कृषि से निकलने वाले जैविक कचरे से कमाई का जरिया तलाश रहे हैं, तो गोवर्धन योजना आपक काम की हो सकती है.
केंद्र सरकार ने GOBARdhan योजना को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये की नई व्यवस्था जारी की है.
इस योजना के तहत CBG प्लांट लगाने वालों को पूंजी सहायता, गैस की खरीद और कीमत से जुड़े सपोर्ट मिलेंगे.
इस योजना का खास मकसद यह है कि गोबर, कृषि अवशेष और दूसरे जैविक कचरे को सिर्फ कचरा मानने के बजाय उससे बायोगैस, CBG और जैविक खाद तैयार करना है.
ऐसे में आइए जानते हैं कि इस योजना में क्या बदला है और आम लोगों को इसका क्या फायदा मिल सकता है.
1. CBG प्लांट लगाने पर मिलेगी आर्थिक मदद
नए CBG प्लांट लगाने वालों को परियोजना की क्षमता के आधार पर पूंजी सहायता दी जाएगी.
ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए पात्र क्षमता के हिसाब से 1.25 करोड़ प्रति टन प्रतिदिन (TPD) तक की सहायता का प्रावधान है. एक प्रोजेक्ट के लिए यह सहायता अधिकतम 30 करोड़ तक दी जा सकती है.
सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा प्लांट को अपग्रेद करने पर भी सहायता का प्रवधान है.
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2. तैयार गैस की बिक्री की चिंता कम होगी
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि प्लांट लगाने के बाद गैस बिकेगी या नहीं, इसी चिंता को कम करने के लिए योजना में बिक्री के लिए उपलब्ध CBG की 100% तक सुनिश्चित खरीद का ऑप्शन दिया जाता है.
इसके लिए CBG को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क या चिन्हित CBG क्लस्टर के जरिए मुख्य गैस पाइपलाइन से जोड़ा जा सकता है. इसे खासतौर पर उत्पादकों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश की गई है.
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📡 स्रोत: ABP Live Vyapar