PM Modi और UAE क्राउन प्रिंस की मुलाकात, रणनीतिक और निवेश साझेदारी पर बनी सहमति
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(फोटो के साथ) नयी दिल्ली, 12 सितंबर भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने शनिवार को व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करने के तौर-तरीकों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अबू धाबी के युवराज खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की समीक्षा की।
दोनों नेताओं ने यहां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर मुलाकात की। मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ हमने रक्षा, एआई, अंतरिक्ष, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और संपर्क जैसे क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तौर-तरीकों पर चर्चा की।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में अनिश्चितता के इस दौर में मजबूत भारत-यूएई संबंध स्थिरता, समृद्धि और शांति का प्रतीक हैं।’’ विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, ‘‘दोनों नेताओं ने माना कि यूएई का नवीनतम संप्रभु निवेश कोष ल इमाद द्विपक्षीय साझेदारी को और गहरा करने में भूमिका निभा सकता है।’’ मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने यूएई की ‘इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी’ (आईएचसी) द्वारा ओडिशा में एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम परियोजना में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर निवेश करने की घोषणा का भी उल्लेख किया।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘इस परियोजना से ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।’’ आईएचसी समूह की कंपनी ‘इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग’ और अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने जुलाई में एल्युमीनियम परियोजना के लिए ओडिशा सरकार के साथ प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार समेत रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर भी चर्चा की।
📡 स्रोत: NewsData.io
💡 पृष्ठभूमि (Background)
भारत और यूएई के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए पीएम मोदी और क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की बैठक हुई। यह विषय भारत-यूएई के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के प्रयासों को दर्शाता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के बीच आर्थिक, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीति पर असर डाल सकता है। आम जनता पर इसका असर निवेश के नए अवसर, रोजगार सृजन और ऊर्जा सुरक्षा में सुधार के रूप में महसूस ह