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POJK के लिए पाकिस्तान पर टूटे 70 ब्रिटिश सांसद, भारत खुश तो बहुत होगा!

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 24 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
POJK के लिए पाकिस्तान पर टूटे 70 ब्रिटिश सांसद, भारत खुश तो बहुत होगा!

पीओजेके जिसे पाकिस्तान अपना हिस्सा कहता है। आज वहां की आवाम के लिए एक खुली जेल बन चुका है। सड़कों पर खौफ है और घरों में मातम है। पाकिस्तानी सेना का क्रूर दमन चक्र अपनी सारी हदें पार कर चुका है। लेकिन क्या पाकिस्तान का पाप का घड़ा भर गया है? दरअसल पिछले कुछ महीनों में पीओजे की स्थिति नरक से भी बदतर हो गई है।

जिस क्षेत्र को शांति का टापू होना चाहिए था उसे पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कसाई खाना बना दिया है। यहां विरोध प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार जो दमन चक्र चलाया गया है वह अभूतपूर्व है। सैकड़ों निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है।

कई ऐसे युवा हैं जो अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं लेकिन उन्हें पाकिस्तानी सेना की गोलियों का सामना करना पड़ा। पूरे इलाके में कर्फ्यू हो, सख्त नाकेबंदी है और सबसे बड़ी बात वहां कम्युनिकेशन ब्लैकआउट लागू है। इंटरनेट बंद है, फोन लाइनें काट दी गई है।

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आखिर पाकिस्तान दुनिया से क्या छिपा रहा है जब किसी इलाके का दुनिया से संपर्क काट दिया जाता है तो समझ लीजिए वहां जुल्म की इंतहा हो रही है और ब्रिटेन में रह रहे कश्मीरी समुदाय के लोग आज अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर खौफ में हैं। हफ्तों से उनकी अपने सगे संबंधियों से बातचीत नहीं हुई है।

उन्हें नहीं पता कि उनके घर वाले जिंदा भी हैं या पाकिस्तानी सेना की बर्बरता का शिकार हो चुके हैं। अब ब्रिटिश सांसदों का कदम यूएन को पत्र क्या है वो समझ लीजिए। देखिए इस मानवीय संकट ने अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। ब्रिटेन के 70 से ज्यादा सांसदों ने जिनमें सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेररेस को एक कड़ा पत्र लिखा है। यह कोई साधारण पत्र नहीं है बल्कि पाकिस्तान के मुंह पर एक बड़ा तमाचा है। इन सांसदों ने स्पष्ट कहा है कि पीओजेके में पाकिस्तानी सेना नरसंहार कर रही है। पत्र में मांग की गई है कि यूएन तुरंत हस्तक्षेप करें।

सांसदों ने इस बात की चिंता जताई है कि निर्दोष नागरिकों की जान बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जागना होगा। ब्रिटिश सांसदों ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त बोलकर तुर्क के उन बयानों का समर्थन किया जिसमें उन्होंने शांतिपूर्ण संवाद, अभिव्यक्ति की आजादी और मौतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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पहला मुद्दा है अवैध गिरफ्तारियां। पाकिस्तानी एजेंसियां रात के अंधेरे में लोगों को घरों से उठा रही हैं। दूसरा है दवा और भोजन की कमी। नाकेबंदी की वजह से चिकित्सा उपकरणों, जीवन रक्षक दवाओं और भोजन की भारी किल्लत हो गई है। लोग इलाज अभाव में दम तोड़ रहे हैं। और तीसरा पॉइंट है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार।

जो कोई भी सेना के खिलाफ बोलता है उसे गद्दार घोषित कर दिया जाता है या उसे हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाता है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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