राजनीति

PoK का स्टेटस बदलने की तैयारी में ड्रैगन और शहबाज सरकार, अचानक क्यों तेज हुई यह भू-राजनीतिक हलचल

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
PoK का स्टेटस बदलने की तैयारी में ड्रैगन और शहबाज सरकार, अचानक क्यों तेज हुई यह भू-राजनीतिक हलचल

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बार फिर से कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को लेकर सरगर्मी बेहद तेज हो गई है।

पिछले कुछ दिनों से इस्लामाबाद के गलियारों में ऐसी सुगबुगाहट तेज है कि पाकिस्तानी हुक्मरान भारत के ऐतिहासिक 'आर्टिकल 370' के तर्ज पर PoK के प्रशासनिक और संवैधानिक ढांचे में एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव करने की गहरी साजिश रच रहे हैं।

जिस तरह से भारत सरकार ने साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर उसे देश की मुख्यधारा के साथ पूरी तरह से एकीकृत कर दिया था, ठीक उसी तर्ज पर अब पाकिस्तान अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए PoK के स्टेटस को पूरी तरह बदलकर उसे अपने किसी अन्य प्रांत की तरह विलय करने का कुचक्र रच रहा है।

इस अचानक मची भू-राजनीतिक हलचल के पीछे न केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक मजबूरियां हैं, बल्कि इसके पीछे चीन के नापाक आर्थिक और सामरिक दबाव का भी बहुत बड़ा हाथ बताया जा रहा है, जो सीपैक (CPEC) प्रोजेक्ट को कानूनी सुरक्षा कवच देने के लिए ऐसा करने को मजबूर कर रहा है। PoK के दर्जे को बदलने की सुगबुगाहट क्यों तेज हुई?

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK को लेकर पिछले दशकों में हमेशा एक दिखावटी विशेष प्रशासनिक ढांचा बनाए रखा गया है, जिसे पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर 'आजाद कश्मीर' कहता है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण हमेशा रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालय और इस्लामाबाद के प्रधानमंत्री कार्यालय से ही होता है।

अब अचानक ऐसी क्या आफत आ गई है कि शहबाज शरीफ सरकार और वहां की ताकतवर फौज इस क्षेत्र के मौजूदा कानूनी और संवैधानिक स्वरूप को पूरी तरह से पलटने की तैयारी कर रही है?

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि स्थानीय कश्मीरी जनता पाकिस्तान के दमनकारी शासन, भारी टैक्स, बिजली कटौती और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ पिछले कई महीनों से सड़कों पर उतरकर हिंसक प्रदर्शन कर रही है।

जनता के भारी विद्रोह और पाकिस्तान विरोधी नारों से घबराए हुक्मरान अब इस क्षेत्र पर अपनी सीधी और लोहे की पकड़ मजबूत करने के लिए कोई नया संवैधानिक दांवपेंच आजमाने की जुगत में लगे हैं, ताकि विरोध की हर आवाज को हमेशा के लिए कुचला जा सके।

चीन का CPEC प्रोजेक्ट और सामरिक मजबूरी इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में ड्रैगन यानी चीन की विस्तारवादी नीतियां और उसका महत्वाकांक्षी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) सबसे अहम भूमिका निभा रहा है।

CPEC का मुख्य मार्ग इसी विवादित PoK के गिलगित-बल्तिस्तान और अन्य इलाकों से होकर गुजरता है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत लगातार अपनी सख्त आपत्ति जताते रहे हैं।

चूंकि यह क्षेत्र कानूनी रूप से एक विवादित क्षेत्र माना जाता है, इसलिए विदेशी निवेशकों और खुद चीन को भी इस बात का हमेशा डर रहता है कि भविष्य में भू-राजनीतिक समीकरण बदलने पर उनके अरबों डॉलर के निवेश का क्या होगा।

चीन अपने इस सामरिक और आर्थिक निवेश को कानूनी सुरक्षा देने के लिए पाकिस्तान पर लगातार दबाव बना रहा है कि वह इस इलाके के संविधान में बदलाव कर इसे अपना आधिकारिक प्रांत घोषित कर दे। यही वजह है कि बीजिंग के इशारे पर इस्लामाबाद में PoK के स्टेटस को बदलने का नापाक खाका तेजी से तैयार किया जा रहा है।

भारत का कड़ा रुख और रणनीतिक निगरानी पाकिस्तान की इस किसी भी हरकत पर भारत की खुफिया एजेंसियों और विदेश मंत्रालय की पैनी और सख्त नजर बनी हुई है। भारत अपने इस रुख पर पूरी तरह अडिग और स्पष्ट है कि पूरा का पूरा पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा।

भारत के आंतरिक मामलों या PoK के भू-राजनीतिक स्वरूप में पाकिस्तान द्वारा किया जाने वाला कोई भी एकतरफा बदलाव पूरी तरह से अवैध और अंतरराष्ट्रीय संधियों के खिलाफ माना जाएगा।

नई दिल्ली में बैठे रणनीतिकार इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि पाकिस्तान अपनी जनता का ध्यान देश के भीतर चल रहे भयंकर आर्थिक संकट, महंगाई, भुखमरी और राजनीतिक अस्थिरता से हटाने के लिए ऐसी खतरनाक चालें चल रहा है।

भारतीय सामरिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पाकिस्तान ने PoK की डेमोग्राफी या उसके कानूनी दर्जे को बदलने की कोई भी हिमाकत की, तो इसका उसे कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बहुत भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पाकिस्तान के इस तथाकथित 'आर्टिकल 370' जैसे दांव से दक्षिण एशिया की शांति और सुरक्षा एक बार फिर से खतरे में पड़ सकती है।

संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर पहले से ही कश्मीर मुद्दे को लेकर मुंह की खाने वाला पाकिस्तान यदि PoK को हड़पने या उसका जबरन विलय करने की कोई कानूनी प्रक्रिया शुरू करता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी अलगाव का सामना करना पड़ सकता है।

पश्चिमी देश और मानवाधिकार संगठन पहले से ही बलूचिस्तान और PoK में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों पर नजर रखे हुए हैं।

इस प्रकार की बलपूर्वक प्रशासनिक फेरबदल से स्थानीय स्तर पर गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं क्योंकि वहां के स्थानीय लोग पाकिस्तान के शासन से तंग आ चुके हैं और वे भारत के साथ अपने ऐतिहासिक जुड़ाव को अंदरखाने महसूस करते हैं।

आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बहुत बड़ा केंद्र बनने वाला है, जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।