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Prabhasakshi NewsRoom: Secret Airbase बनाने में तेजी से जुटा है China, सैटेलाइट तस्वीरों ने Lop Nur में बन रहे खतरनाक मिलिट्री टेस्ट बेस का किया खुलासा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 12 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
Prabhasakshi NewsRoom: Secret Airbase बनाने में तेजी से जुटा है China, सैटेलाइट तस्वीरों ने Lop Nur में बन रहे खतरनाक मिलिट्री टेस्ट बेस का किया खुलासा

चीन सिर्फ जमीन और समुद्र में ही अपनी सैन्य ताकत नहीं बढ़ा रहा, बल्कि वह आसमान पर अगली पीढ़ी का वर्चस्व स्थापित करने की तैयारी में भी पूरी ताकत झोंक चुका है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिनजियांग के दुर्गम और वीरान रेगिस्तान में स्थित लोप नूर (Lop Nur) को तेजी से विस्तार देकर बीजिंग एक ऐसा विशाल फ्लाइट-टेस्ट कॉम्प्लेक्स तैयार कर रहा है, जो आने वाले वर्षों में चीन के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और संभावित स्टील्थ बॉम्बर कार्यक्रमों का केंद्र बन सकता है।

देखा जाये तो यह अमेरिका को सीधी रणनीतिक चुनौती देने वाली चीन की एयर-पावर महत्वाकांक्षा का नया अध्याय है। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, लोप नूर स्थित इस सुविधा में चार विशाल हैंगर, नई टैक्सीवे, एक गोलाकार पैड और संभावित ईंधन भंडारण ढांचा तैयार किया जा रहा है।

माना जा रहा है कि गोलाकार संरचना का इस्तेमाल इंजन परीक्षण या विमानों को घुमाने और संचालन संबंधी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। निर्माण की गति और पैमाना साफ संकेत देते हैं कि चीन यहां सामान्य परीक्षण सुविधा नहीं, बल्कि एक बहुस्तरीय और अत्यधिक गोपनीय एयरोस्पेस टेस्ट हब विकसित कर रहा है।

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रिटायर्ड अमेरिकी नौसेना खुफिया अधिकारी और एयरोस्पेस मामलों के विशेषज्ञ जे.

माइकल डाहम ने इस संबंध में मीडिया से बातचीत में कहा है कि इस बड़े विस्तार की शुरुआत लगभग अगस्त 2025 में हुई। यही वह समय था जब चीन के कथित छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान J-36 को पहली बार इस इलाके में देखा गया। इसके महज 17 दिन बाद एक अन्य अगली पीढ़ी के विमान जिसे J-XDS या J-50 कहा जा रहा है, उसके भी इसी परिसर में देखे जाने की जानकारी सामने आई।

यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। क्योंकि इसका मतलब है कि चीन संभवतः एक साथ कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान कार्यक्रमों पर काम कर रहा है। अगर ऐसा है तो लोप नूर का विस्तार चीन को एक ही समय में कई संवेदनशील विमानों के उड़ान परीक्षण, तकनीकी मूल्यांकन और विकास का अवसर देगा। दूसरे शब्दों में कहें तो बीजिंग अब अपनी अगली पीढ़ी की एयर-पावर परियोजनाओं को क्रमवार नहीं, बल्कि समानांतर गति से आगे बढ़ाने की क्षमता तैयार कर रहा है।

फरवरी तक इस परिसर में लगभग 60,000 वर्ग फुट अतिरिक्त हैंगर स्पेस और 3 लाख वर्ग फुट से अधिक अन्य बुनियादी ढांचा जुड़ चुका था। रिपोर्टों के अनुसार, नई सुविधाओं में परीक्षण और मूल्यांकन क्षेत्र के साथ-साथ कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था भी शामिल हो सकती है। कुल मिलाकर इस विस्तार ने बेस के आकार और संचालन क्षमता को लगभग दोगुना कर दिया है।

लोप नूर की सबसे बड़ी ताकत उसकी भौगोलिक स्थिति है। विशाल, वीरान और कम आबादी वाले शिनजियांग क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां अत्यंत गोपनीय उड़ान परीक्षणों को आम निगरानी और आबादी की नजरों से दूर किया जा सकता है। यह चीन को संवेदनशील प्रोटोटाइप विमानों के परीक्षण के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच देता है।

पहले से मौजूद 5 किलोमीटर लंबा रनवे इस सुविधा की महत्वाकांक्षा को और स्पष्ट करता है। यह परिसर कम से कम 2020 से चीन के पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष यान कार्यक्रम से भी जुड़ा रहा है। अमेरिका-चीन की छठी पीढ़ी की जंग लोप नूर का विस्तार ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका और चीन अगली पीढ़ी की वायु शक्ति की दौड़ में आमने-सामने हैं।

भविष्य के लड़ाकू विमान सिर्फ तेज या स्टील्थ नहीं होंगे। वे उन्नत ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिस्टम, अत्याधुनिक सेंसर और लंबी दूरी के हथियारों के साथ नेटवर्क में काम करेंगे। हम आपको यह भी बता दें कि चीन ने अभी तक J-36 और J-XDS/J-50 की आधिकारिक भूमिका, तकनीकी विशेषताओं या औपचारिक नामों की पुष्टि नहीं की है।

लेकिन अमेरिकी पेंटागन की रिपोर्ट इन्हें अभी विकास के शुरुआती चरण में मानती है और अनुमान लगाती है कि ये विमान 2035 तक ऑपरेशनल हो सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि अगर चीन ने परीक्षण ढांचा अभी से इतना विशाल बनाना शुरू कर दिया है, तो क्या बीजिंग विकास की रफ्तार को तेज करने की तैयारी कर रहा है?

यही वह रणनीतिक निहितार्थ है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विमान बनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे तेजी से परीक्षण कर युद्ध के लिए तैयार करना उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। विशाल हैंगरों और अलग-अलग परीक्षण क्षेत्रों के जरिए चीन कई कार्यक्रमों को एक साथ संचालित कर सकता है। इससे मौजूदा परीक्षण केंद्रों पर दबाव घटेगा और नए विमानों के विकास की गति बढ़ सकती है। क्या H-20 स्टील्थ बॉम्बर भी है तस्वीर में?

इसके अलावा, लोप नूर के विस्तार ने चीन के रहस्यमय H-20 स्टील्थ स्ट्रैटेजिक बॉम्बर को लेकर भी अटकलों को हवा दे दी है। H-20 को लंबे समय से चीन का संभावित लंबी दूरी का स्टील्थ बॉम्बर माना जाता रहा है, लेकिन इसे अब तक सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया है और न ही इसके आधिकारिक विवरण की पुष्टि हुई है।

हालांकि नई संरचनाओं का आकार सवाल जरूर खड़े करता है। दक्षिणी एप्रन पर बने तीन हैंगरों का आकार लगभग 80 गुणा 40 मीटर बताया गया है। ये इतने बड़े हैं कि चीन के मौजूदा बेड़े के बड़े विमानों, यहां तक कि लगभग 33 मीटर विंगस्पैन वाले H-6 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर को भी समायोजित कर सकते हैं। हैंगरों की चौड़ाई सामान्य लड़ाकू विमानों के शेल्टर से कहीं अधिक बताई जा रही है।

इसलिए भविष्य में बड़े विंगस्पैन वाले विमानों के लिए इनके इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि H-20 और इन हैंगरों के बीच फिलहाल कोई प्रत्यक्ष और पुष्ट संबंध सामने नहीं आया है। भारत और हिंद-प्रशांत के लिए संदेश इस पूरे घटनाक्रम का सामरिक महत्व केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है।

भारत सहित पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को चीन के इस तेजी से बढ़ते एयरोस्पेस ढांचे पर नजर रखनी होगी। शिनजियांग में विकसित हो रही परीक्षण क्षमता भविष्य के उन प्लेटफॉर्मों को जन्म दे सकती है, जो लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों, ड्रोन और अत्याधुनिक सेंसर के साथ काम करेंगे। देखा जाये तो चीन केवल विमान नहीं बना रहा, बल्कि वह भविष्य की हवाई लड़ाई की फैक्ट्री तैयार कर रहा है।

शेनयांग में मौजूदा सुविधा से लगभग 16 किलोमीटर उत्तर में बनाया जा रहा नया उत्पादन परिसर भी इसी तस्वीर का हिस्सा है। अनुमान है कि वहां लगभग 40 लाख वर्ग फुट का विनिर्माण क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। लोप नूर की कहानी इसलिए केवल चार नए हैंगरों की कहानी नहीं है। यह उस चीन की कहानी है, जो युद्ध की अगली पीढ़ी के लिए अपना औद्योगिक और तकनीकी ढांचा खड़ा कर रहा है।

रेगिस्तान की खामोशी में बन रहा यह विशाल अड्डा आने वाले वर्षों में आसमान की शक्ति-संतुलन की दिशा बदल सकता है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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