प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से स्वर्णकार दीपक सोनी ने बढ़ाया पारंपरिक आभूषण का कारोबार
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प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से कारीगरों को मिल रही नई दिशा, नगड़ी के स्वर्णकार दीपक सोनी ने योजना से बढ़ाया कारोबार, प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट से निखर रहा पारंपरिक हुनर, वित्तीय सहायता से कारीगरों को कारोबार विस्तार का अवसर।
Short Headline: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से स्वर्णकार दीपक सोनी ने बढ़ाया पारंपरिक आभूषण का कारोबार
पीएम विश्वकर्मा योजना, रांची, अवधेश
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से कारीगरों को मिल रही नई दिशा
नगड़ी के स्वर्णकार दीपक सोनी ने योजना से बढ़ाया कारोबार
प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट से निखर रहा पारंपरिक हुनर
वित्तीय सहायता से कारीगरों को कारोबार विस्तार का अवसर
एंकर प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की पहल है। रांची के नगड़ी निवासी स्वर्णकार दीपक सोनी भी इस योजना से जुड़कर अपने पारंपरिक कारोबार को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
होल्ड अप साउंड रिपोर्ट
वीओ 01. रांची के नगड़ी निवासी दीपक सोनी का परिवार पीढ़ियों से स्वर्णकारी के काम से जुड़ा है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से जुड़ने के बाद उन्हें आधुनिक डिजाइन और तकनीक के अनुरूप आभूषण तैयार करने का प्रशिक्षण मिला। योजना के तहत उन्हें जरूरी टूलकिट उपलब्ध कराई गई और शुरुआती एक लाख रुपये की ऋण सहायता भी मिली, जिसे उन्होंने निर्धारित समय में चुका दिया है।
बाइट– दीपक सोनी, लाभार्थी
वीओ 02. दीपक सोनी ने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से उनके कारोबार को नई दिशा मिली है। प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक की जानकारी मिलने से वे अपने काम में नए प्रयोग कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि योजना से जुड़ने के बाद कारोबार में तेजी आई और नए ग्राहक भी बनें।
बाइट– दीपक सोनी, लाभार्थी
वीओ 03. दीपक की पत्नी सीमा सोनी भी उनके कारोबार को आगे बढ़ाने में सहयोग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि दीपक अपने कारोबार में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे उन्हें योजना के तहत प्रोत्साहन का लाभ भी मिलता है।
बाइट– सीमा सोनी, दीपक की पत्नी
अंतिम वीओ प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के जरिए पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, उपकरण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कारीगरों को अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़कर कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
रांची से अवधेश गौतम की रिपोर्ट।