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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अपने विचार साझा किए

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 25 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लोगों से अपने विचार साझा किए

रायपुर, 25 अक्टूबर 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सुबह 11 बजे आकाशवाणी से ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश-विदेश के लोगों से अपने विचार साझा किए, यह मासिक रेडियो कार्यक्रम की 139वीं थी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि मन की बात ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह सफर किसी तीर्थयात्रा-सा रहा है। आज आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में उन्‍होंने कहा कि यह कार्यक्रम 12 वर्ष पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर शुरू हुआ था जो अनवरत जारी है। श्री मोदी ने कहा कि इस कार्यक्रम के श्रोता सहयात्री भी रहे हैं और मार्गदर्शक भी। उन्‍होंने यह भी कहा कि मन की बात देश के सामान्‍य जनमानस के परिश्रम, पराक्रम, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवाभाव के गौरवगान का शुभ अवसर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को नमन करने की रही है। उन्‍होंने कहा कि जो लोग समाज और राष्‍ट्र के लिए जीते हैं, वे स्वयं तीर्थ जैसे हैं। श्री मोदी ने यह भी कहा कि वे मन की बात के जरिए देश की लोकशक्ति की आराधना कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्‍हें मन की बात के माध्‍यम से हर परिवार से जुड़ने का अवसर मिलता है तथा श्रोताओं की आत्‍मीयता और उनका स्‍नेह अमूल्‍य पूंजी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ऐसे अनेक पारंपरिक हुनर हैं जो पीढियों से हमारी पहचान का हिस्‍सा रहे हैं। उन्‍होंने पंजाब की एक पहल की चर्चा की जहां खेती विरासत मिशन नामक संस्‍था ने जैविक कृषि और पारंपरिक कृषि के तौर-तरीकों को नया जीवन देना शुरू किया है। इस प्रयास को नव-त्रिंजन नाम दिया गया है जिसके रसायन का इस्‍तेमाल किए बिना ही ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है।

इससे तैयार धागे और कपडे को रंगने के लिए अलग से रसायन के इस्‍तेमाल की जरूरत नहीं पडती। नव त्रिंजन ने बुनाई स्‍कूल की भी शुरूआत की है जिसका लक्ष्‍य बुनकरी के हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। श्री मोदी ने कहा कि मजदूर के रूप में काम करने वाली रमनदीप कौर, घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली सुनेहा देवी और श्रमिक रजनी कौर की पहचान अब कुशल बुनकर के तौर पर है।

उन्‍होंने रेखा रानी की भी चर्चा की जिनकी बुनी शॉल माननीया राष्‍ट्रपति जी को भेंट की गई है।

प्रधानमंत्री ने प्रकृति के संरक्षण के महत्‍व की चर्चा करते हुए उत्‍तराखंड के टिहरी गढवाल में हेवेल नदी को नया जीवन देने के प्रयासों की बात की। उन्‍होंने कहा कि यह नदी और आस-पास के प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे थे। स्‍थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर इस नदी को बचाने का अभियान चलाया और बारिश का पानी रोकने के प्रयास किए गये। जमीन में पानी पहुंचाने की भी पहल की गई और बडी संख्‍या में पौधे लगाये गये। श्री मोदी ने संतोष व्‍यक्‍त किया कि इन प्रयासों के कारण हेवल नदी को नया जीवनदान मिला है और दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दीवाली और छठ से पहले जगह-जगह सफाई अभियान चलाया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि हम जहां रहते हैं, वहां की स्‍वच्‍छता का ध्‍यान रखना जरूरी है और छोटे-छोटे प्रयास ही हमारे आस-पास बडा बदलाव ला सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि त्‍योहारी मौसम में लोग खरीदारी में स्‍वदेशी उत्‍पादों को बहुत महत्‍व देने लगे हैं। उन्‍होंने कहा कि वोकल फॉर लोकल की भावना उत्‍पादों को दुनिया के बाजारों तक पहुंचा रही है। श्री मोदी ने बिहार के पूर्णिया जिले का जिक्र किया जहां से मखान अब ग्रीस पहुंच रहा है। इसी तरह कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल अब मालदीव जा रही है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय किसानों के लिए दुनिया में नये बाजार खुल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी पैकेजिंग भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने महाराष्ट्र के जनजातीय समुदायों का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने उत्पादों की पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया है। 'शबरी नैचुरल्स' नामक एक पहल के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को उनकी आदिवासी कला को प्रतिबिंबित करने वाली पैकेजिंग के साथ बाजार में लाया जा रहा है। श्री मोदी ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का 'गुड डिज़ाइन अवार्ड' मिला है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कर्नाटक की एक 'बांस' स्टार्टअप कंपनी के बारे की चर्चा की जो बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री बना रही है। प्रधानमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग के उत्पादों की बिक्री 28 करोड़ रुपये से अधिक की रही। यह पिछले वर्ष के मुकाबले डेढ़ करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने कहा कि खादी की लोकप्रियता बढ़ रही है और इसका लाभ उन लोगों तक पहुंच रहा है जिनके हुनर और मेहनत से खादी हस्तशिल्प जैसी अनेक चीज़ें बनती हैं।

प्रधानमंत्री ने त्योहारों के मौसम में खरीदारी में स्थानीय कारीगरों के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को मजबूती मिलेगी और 'आत्मनिर्भर भारत' का सपना जल्द साकार होगा।

प्रधानमंत्री ने ई-संजीवनी योजना पर संतोष व्यक्त किया। अब तक इस प्लेटफार्म पर लगभग 50 करोड़ टेली-परामर्श लिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक की ताकत, डॉक्टरों के सेवाभाव और देशवासियों के विश्वास का बेहतरीन उदाहरण है। श्री मोदी ने कहा कि अपने विशाल नेटवर्क के माध्यम से, 'ई-संजीवनी' सेवा देश के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बारातांग द्वीप की जारवा जनजाति के ओहो-ताहाने, लक्षद्वीप के कालपेनी में कुन्ही कोया, लद्दाख के ज़ांस्कर के कुंजंग डोलमा, नागालैंड के पेरेन में मुशेम नाम की चर्चा की जो इससे लाभ ले चुके हैं।

श्री मोदी ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब छोटी-सी स्वास्थ्य जांच या डॉक्टर को दिखाने में भी लंबा समय लग जाता था और बहुत कठिनाइयां होती थीं। लेकिन अब, देशभर में लगभग एक लाख नब्बे हजार 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' हैं जो नई सुविधाएं लेकर आए हैं। श्री मोदी ने कहा कि ये आरोग्य मंदिर ग्राम पंचायतों के लिए स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इस महीने के शुरु में, चेन्नई यात्रा के दौरान कई वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि देश के युवा वर्तमान में ऐसे विषयों पर काम कर रहे हैं जिनमें भविष्य को बदलने की क्षमता है। 'मस्तिष्क अनुसंधान' ऐसा ही एक क्षेत्र है।

श्री मोदी ने आईआईटी-मद्रास में 'सुधा गोपालकृष्णन मस्तिष्क केंद्र' का उद्घाटन किया था। इस केंद्र ने एक मस्तिष्क इमेजिंग प्रौद्योगिकी मंच विकसित किया है जो दुनिया भर के लिए मिसाल है। इससे मस्तिष्क की उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली डिजिटल 3डी छवियां बनाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य 100 लोगों के मस्तिष्क का बारीकी से अध्ययन करना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह विश्व में अपनी तरह का पहला मिशन है, जो 'परम शक्ति' सुपरकंप्यूटर का उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि इस मस्तिष्क केंद्र की स्थापना में देश के उद्योग जगत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आईआईटी के कई पूर्व विद्यार्थी और शिक्षाविद भी इस अनुसंधान केंद्र के समर्थन में आगे आए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्नत अनुसंधान में अंगदान की बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया, जिसकी सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। श्री मोदी ने कहा कि मानवता का ऐसा कदम किसी परिवार के जीवन में खुशियां वापस ला सकता है और अनुसंधान प्रयासों में भी बड़ी सहायता दे सकता है।

प्रधानमंत्री ने चेन्नई यात्रा के अपने कुछ अन्य अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जिन स्टार्टअप्स से वे मिले, उनमें से एक सोने की गुणवत्ता की जांच पर केंद्रित है, जिससे सोने की खरीद में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिल सकती है। श्री मोदी ने कहा कि आईआईटी-मद्रास में उनकी बातचीत डीपटेक यानी उन्नत तकनीक पर केंद्रित थी।

इन स्टार्टअप को आईआईटी मद्रास के इनक्यूबेशन पारितंत्र से मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि एक स्टार्टअप समुद्र के ऊपर उड़ान भरने में सक्षम इलेक्ट्रिक वाहन विकसित कर रहा है, जबकि दूसरा ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए तेजी से चार्ज होने वाली बैटरियां बना रहा है। श्री मोदी ने कहा कि एक टीम रक्षा तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस- एआई के इस्तेमाल पर काम कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि आज युवाओं को सही माहौल और सहयोग मिल रहा है, जिसके कारण वे असाधारण उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 31 अक्तूबर को देश महान भारतीय वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी की सौवीं जयंती मनाएगा। दुनिया उन्हें फाइबर ऑप्टिक्स का जनक के रूप में जानती है। उनका जन्म पंजाब के मोगा जिले में हुआ था। श्री मोदी ने कहा कि पतले रेशों के जरिए प्रकाश के संचार की तकनीक पर नरिंदर सिंह कपानी के शोध ने संचार के क्षेत्र को नई दिशा दी। प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं से ऐसे वैज्ञानिकों के बारे में पढ़ने और उनसे प्रेरणा लेने की अपील की।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि 31 अक्तूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती यानी एकता दिवस पर देशभर में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि यह दौड़ राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर देती है। श्री मोदी ने सभी से इस वर्ष रन फॉर यूनिटी में उत्साहपूर्वक भागीदारी की अपील की।

प्रधानमंत्री ने मोटे अनाज के विषय में कि भारत के अनुरोध पर वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया गया था। दुनियाभर में इसपर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इससे यह जानने का अवसर मिला कि मोटा अनाज हमारी संस्कृति में कितनी गहराई से जुड़ा है। श्री मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में भी मोटे अनाज की खेती की समृद्ध परंपरा रही है।

कुछ समय से लोग इससे दूर होने लगे थे, लेकिन अब फिर से स्थिति बदल रही है। उन्होंने मेघालय के पश्चिम जैंतिया हिल्स जिले के खांडुली गांव की चर्चा की जहां कई पीढ़ियों से मोटा अनाज खानपान का अहम हिस्सा रहा है। कुछ समय से यहां मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों की संख्या घट रही थी। गांव की दो महिलाओं ने मोटे अनाज से कुकीज़, केक, मफिन और बच्चों के लिए आहार तैयार किए।

इन नए उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री ने मेघालय के पश्चिम गारो हिल्स जिले के सादोलपारा गांव के किसान चेकजिंग संगमा का जिक्र किया जिन्होंने आधुनिक तरीकों से इसकी खेती शुरू की। इससे उनकी आमदनी बढ़ी है और गांव में भी इसके प्रति जागरूकता बढ़ी है। श्री मोदी ने नगालैंड के कोहिमा जिले के केजोमा गांव का भी जिक्र किया, जहां दस साल से अधिक समय तक मोटे अनाज की खेती बंद थी।

वर्ष 2024 में स्थानीय लोगों ने दोबारा इसकी खेती शुरू की और पिछले वर्ष गांव में पहली बार मोटा अनाज महोत्सव मनाया गया। अब इस क्षेत्र में भी मोटे अनाज से बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। श्री मोदी ने कहा कि ये उदाहरण बताते हैं कि भारत के युवा पारंपरिक फसलों को नए अवसरों से जोड़ रहे हैं और गांव अपनी विरासत को सहेजते हुए समृद्धि की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष बाद भी वाल्मीकि रामायण हमें कुछ नया सिखाती है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के माध्यम से दृढ़ संकल्प, सेवा, करुणा और सामाजिक सद्भाव जैसे जीवन-मूल्य सिखाए हैं। श्री मोदी ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का सुंदर उदाहरण है। उन्होंने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को स्वीकार किया और निषादराज के साथ अपनी मित्रता का मान रखा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सबको साथ लेकर चलने की भावना आज भी लोगों का मार्गदर्शन करती है। यह भावना अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देती है, जहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को समर्पित मंदिर हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्‍यक्‍त की कि अयोध्या के हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 4 नवंबर को भाई परमानंद की 150वीं जयंती मनाएगा। उन्होंने बताया कि आर्य समाज से भाई परमानंद का जुड़ाव उनके लिए प्रेरणा और आदर्श का एक बड़ा स्रोत रहा है। बीसवीं सदी के शुरु में, भाई परमानंद आर्य समाज के कार्यों के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे। उन्होंने गयाना में गिरमिटिया समुदाय के बीच भी काम किया।

उस समय गुयाना आर्य समाज का एक प्रमुख केंद्र था। श्री मोदी ने कहा कि भाई परमानंद गदर पार्टी के संस्थापक सदस्य थे। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रियता के कारण अंग्रेज़ों ने उन्हें काला पानी की सजा सुनाई थी। उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी थी जिसका नाम है- आपबीती: काले पानी की कारावास कहानी। श्री मोदी ने बताया कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को सही मायने में समझने के लिए यह पुस्तक जरूर पढ़ी जानी चाहिए।

भाई परमानंद ने भगत सिंह को भी पढ़ाया था और वे लंबे समय तक हिंदू महासभा से जुड़े रहे था। श्री मोदी ने लोगों को भाई परमानंद के जीवन के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित किया।

अंत में, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने दीपावली और छठ सहित आने वाले त्योहारों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहते हुए इन त्योहारों को मनाएंगे।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आकाशवाणी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 12 वर्ष पूरे करने के अवसर पर अपने विचार साझा किए। यह कार्यक्रम, जिसे प्रधानमंत्री ने 2014 में शुरू किया, नागरिकों के साथ संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। इस बार 139वीं कड़ी में उन्होंने देश-विदेश के लोगों से बातचीत की, जिससे जनता को सीधे सरकार की नीतियों और योजनाओं के बारे में जानकारी मिलती है। इस संवाद से आम जनता को नीतिगत निर्णयों में भागीदारी का अनुभव होता है, जिससे विश्वास और पारदर्शिता बढ़ती है, और नागरिकों की आवाज

🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

आकाशवाणी के ‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने 12‑वर्षीय सफ़र का जिक्र करते हुए समाज को एकजुट रहने की प्रेरणा दी। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि संवाद और सहानुभूति से विवादों का समाधान संभव है। चाहे वह घरेलू मतभेद हो या आर्थिक झगड़ा, कानूनी रास्ते और शांत वार्ता से समाधान निकाला जा सकता है। इस संवाद से हम सभी को मिलकर एक समृद्ध, शांतिपूर्ण समाज की ओर अग्रसर होना चाहिए।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।