प्रशांत किशोन ने समझाया मुस्लिम-ब्राह्मणों के वोट का फॉर्मूला, दी ये नसीहत
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बिहार में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें वह ब्राह्मण और मुस्लिम वोट के समीकरण पर बात करते नजर आ रहे हैं.
वह कह रहे हैं कि मेरे भाई आप के दादा-परदादा पुरखे कांग्रेस के थे. कोई यहां विधायक था. हालांकि, लोकतंत्र में सीधा-सीधा गणना है कि आपको किसे कितने वोट मिलेंगे.
प्रशांत किशोर ने ब्राह्मणों से कहा कि आपका साथ सरस्वती से कैसे छूटा में बताता हूं. मैं उदाहरण देकर बताता हूं. आप जान रहे हैं कि चुनाव जीतने के लिए वोट देने पड़ेंगे.
अब आप तो जनसंख्या बढ़ा नहीं सकते हैं. इसके अलावा कह दिया गया कि 20 फीसदी वोट मुस्लिम देते हैं. इसके बाद आप बीजेपी का झंडा हाथों में लेकर झुन-झुना बजाने लगे. इस वजह से 20 फीसदी लोग निकल कर चले गए.
इसके बाद आपको लगने लगा कि अब चुनाव कैसे जीते.
मुसलमानों से किस चीज का लड़ाई है- प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने ब्राह्मणों से सवाल करते हुए पूछा कि आपका मुसलमानों से किस चीज का लड़ाई है. जमीन का लड़ाई है, आरक्षण का लड़ाई है. इनमें से कौन सी चीज की लड़ाई है.
आप कभी दंगे में नहीं गए आप से तो चींटी नहीं मारा जाएगा, लेकिन फेसबुक पर जाकर भाजपाई बनकर मुसलमानों का गाली देने लगते हैं.
इसक नतीजा क्या हुआ, जिसके वोट से आप राजा बनते थे वह छोड़कर दूसरी जगह चला गया और खुद को बुद्धिजीवी बता रहे हैं. ये कौन सा ज्ञान है. आज की राजनीति में जिस अति-पिछड़ा समाज की चर्चा हो रही है वह है नहीं.
आपकी ताकत कलम है- प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने कहा कि आप लोग को सीखा दिया गया कि ये दूसरे परशुराम है.
अरे भाई आप लोग गलत रास्ते में जा रहे हैं. परशुराम का विषय एक तरह से लिया जाता है. आपकी ताकत कलम है. आपकी ताकत सरस्वती है. आप फरसा चलाने वाले नहीं है.
स्थिति ऐसी हो गई है कि आपका समाज भी परशुराम जंयती मानने के लिए आंदोलन कर रहा है. ऐसे पेट थोड़े ही भरेगा. इस तरह से आप विनाश के रास्ते में जा रहे हैं.
आप से इतना ही आग्रह है कि बुद्धि से काम लिजिए. आपका ताक
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
प्रशांत किशोन, बिहार की जनसुराज पार्टी के संस्थापक, ने हाल ही में एक वीडियो में मुस्लिम‑ब्राह्मण वोट के समीकरण पर चर्चा की, जिसमें उन्होंने कहा कि दादा‑परदादा कांग्रेस के थे और यहाँ विधायक भी रहे हैं। यह विषय चुनावी गठबंधनों और मतदाता आधार पर आधारित रणनीतियों पर प्रकाश डालता है। खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे राजनेता जाति‑धर्म के आधार पर वोटिंग पैटर्न को समझते और उपयोग करते हैं। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग अपनी पहचान और वोटिंग पैटर्न के प्रति अधिक जागरूक हों, ज