प्रशासनिक बाधाएं होंगी दूर:अब जिला कोर्ट कर सकेंगी 80 लाख तक की खरीदी, बेहतर होंगी सुविधाएं
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →मध्य प्रदेश के जिला न्यायालयों में अब छोटी-छोटी प्रशासनिक स्वीकृतियों और समानों की खरीदी के लिए लंबी फाइलों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राज्य शासन के वित्त विभाग ने एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश के जिला एवं सत्र न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीशों को वित्तीय अधिकार दे दिए हैं।
इन मामलों में पहले हाई कोर्ट निर्णय लेता था। नए आदेश के बाद अब अदालतें अपनी आवश्यकता के अनुसार स्थानीय स्तर पर ही लाखों रुपए तक के उपकरण, सामग्री और सेवाएं सीधे खरीद सकेंगी, जिससे अदालती कामकाज और बुनियादी सुविधाओं के विकास में तेजी आएगी। क्यों पड़ी इस आदेश की जरूरत अदालतों के सुचारू संचालन और आम जनता व न्याय प्रक्रिया से जुड़े लोगों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, इससे पहले जिला न्यायालयों को भवनों के रख-रखाव, सुरक्षा उपकरणों, तकनीकी साधनों और अन्य जरूरी सामग्री की खरीदी के लिए कई बार जटिल और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था। कई बार छोटी-सी खरीदी के लिए भी उच्च स्तर से अनुमति लेने के चक्कर में प्रकरण या ठेकेदारों के भुगतान लंबे समय तक लंबित रहते थे, जिससे अदालती कामकाज प्रभावित होता था।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से प्रशासनिक बाधाएं दूर होंगी और स्थानीय स्तर पर त्वरित निर्णय लिए जा सकेंगे। किस न्यायालय को मिले कितने वित्तीय अधिकार?
जिला एवं कुटुंब न्यायालयों में चीफ जस्टिस की अनुमति प्रदेश में जिला एवं कुटुंब न्यायालयों में कार्यालयीन सामग्री की खरीदी को लेकर नई वित्तीय सीमाएं तय कर दी गई हैं। इसके तहत अब न्यायालयों में कंप्यूटर, प्रिंटर, फर्नीचर और अन्य साजो-सामान की खरीदी वहां मौजूद कोर्ट की संख्या और बजट के आधार पर होगी। तय सीमा 80 लाख रुपए से ज्यादा होती है तो इसके लिए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुमति लेना होगी। इसमें शर्त यह रहेगी कि वित्तीय अधिकारों का उपयोग केवल तभी किया जा सकेगा जब संबंधित मद में कार्यालय का बजट आवंटन उपलब्ध हो।
📡 स्रोत: NewsData.io