राजनीति

प्रश्न हिमालय का नहीं, शिव के भाल का है

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 25 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
प्रश्न हिमालय का नहीं, शिव के भाल का है

देश सावन में शिव के महिमा गायन का मासिक पर्व मना रहा है. शिव वागर्थ हैं. ऐसे जैसे वाणी और अर्थ चिपके रहते हैं. इसीलिए वह अर्द्धनारीश्वर भी हैं. वह महाकाल हैं. यानी समय के नियंता. समय के पांच अंग होते हैं. इन्हीं के आधार पर पंचांग बनते हैं.

दुर्भाग्य यह है कि शिव के ही इस भारत में देश की राजनीति का पंचांग नहीं बन पा रहा है. हमारी सभी पार्टियों के पुरोहित सलाहकार योग बैठा भी ले रहे हैं तो कारण नहीं बता पा रहे हैं. नक्षत्र किसी के ठीक नहीं चल रहे हैं. सब एक-दूसरे के वैरी भाव में हैं.

विलुप्तगामी पार्टियों को छोड़ दें तो बाकी सभी पर कमोबेश शनि की महादशा चल रही है. इसीलिए संसद नहीं चली. करीब डेढ़ सौ सांसदों ने लोकसभा को बंधक बना लिया. साढ़े तीन सौ टुकुर-टुकुर देखते रहे. राज्य सभा में भी यही स्थिति थी.

📡 स्रोत: NewsData.io

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