प्रश्नकाल में उठा कुल्लू अस्पताल में प्रसूता मंजू की मौत का मामला, सीएम सुक्खू ने दोषीयों के खिलाफ उचित कार्रवाई का दिया आश्वासन
अगस्त 31, शिमला (हिमाचल प्रदेश): तीन दिन के अवकाश के बाद हिमाचल प्रदेश विधानसभा मानसून सत्र की कार्यवाही हमीरपुर बड़सर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे राम रतन शर्मा के निधन पर शोकोदगार प्रस्ताव के साथ हुई।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में शोकोदगार प्रस्ताव रखा जिसमें नेता विपक्ष जयराम ठाकुर, बड़सर विधायक इंद्र दत्त लखनपाल औए विधानसभा अध्यक्ष ने भी हिस्सा लिया।इस दौरान विधायकआत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई और उनके योगदान को याद किया गया।
कुल्लू के क्षेत्रीय अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामला आज विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान उठा।
नेता वीपक्ष जयराम ठाकुर ने मामले को लेकर की जा रही जांच की रिपोर्ट मांगी और पूछा कि इसमें लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर के खिलाफ सरकार ने अभी तक क्या कार्रवाई की है जिस पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने खुद खड़े होकर विस्तृत जवाब दिया और कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से मैं दुख व्यक्त करता हूं।
एक परिवार ने अपनी बेटी खोई है, एक पति ने अपनी पत्नी खोई है और एक नवजात बच्ची जन्म लेते ही अपनी मां के स्नेह से वंचित हो गई है। ऐसी घटना को केवल आरोप-प्रत्यारोप या राजनीतिक चश्मे से देखना उचित नहीं है। 25 जून को मृतका के पति ने एसपी कुल्लू को ई-मेल से शिकायत भेजी।
इसमें डॉक्टर अनु और ड्यूटी स्टाफ नर्स पर लापरवाही के गंभीर आरोप थे, जैसे हाई ब्लड प्रेशर के बावजूद समय पर इलाज न देना, निगरानी न करना, दवाइयां, ऑक्सीजन और खून की व्यवस्था में कमी।सीएम ने कहा कि शिकायत मिलते ही सरकार ने इसे हल्के में नहीं लिया। संबंधित डॉक्टर का तुरंत ट्रांसफर कर दिया गया।
मेरी खुद मृतका के पति से बात हुई थी, मैंने आश्वासन दिया था कि सख्त कार्रवाई होगी। सीएम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि मेडिकल लापरवाही का फैसला सिर्फ पुलिस की राय पर नहीं हो सकता, एक्सपर्ट राय जरूरी है। इसलिए 5 सदस्यीय जांच समिति ने सारे रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर और डॉक्टरों के बयान जांचे हैं।
सरकार का उद्देश्य न तो डॉक्टर को बचाना है, न प्रदर्शनकारियों को प्रताड़ित करना है। यदि बोर्ड आपराधिक लापरवाही पाता है तो दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा। सरकार को सत्य से कोई भय नहीं है। लेकिन बिना विशेषज्ञ राय के सदन में ही किसी डॉक्टर को अपराधी घोषित करना भी न्याय नहीं है।
अब विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड गठित कर राय मांगी गई है कि क्या लापरवाही हुई और क्या उसका संबंध मौत से है। रिपोर्ट आते ही बिना किसी दबाव और पक्षपात के कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।